राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 राज्य स्तरीय स्टेयरिंग समिति के सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी), विद्यार्थियों को क्रेडिट स्थानांतरण व पुन: प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इससे विद्यार्थी आसानी से विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में क्रेडिट स्थानांतरित कर सकेंगे और विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में भी परिवर्तन आसान होगा। साथ ही शैक्षिक संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
बृहस्पतिवार को वह टीकाराम कन्या महाविद्यालय के सभागार में एबीसी पोर्टल पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने पोर्टल पर राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, शिक्षकों व विद्यार्थियों का डाटा अपलोड कराने संबंधी जानकारी दी। मुख्य अतिथि राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि एबीसी के तहत विद्यार्थियों के क्रेडिट सात वर्षों तक सुरक्षित रहेंगे। कुलसचिव महेश कुमार ने विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों व विद्यार्थियों की डाटा अपलोड संबंधी समस्याओं का तत्परता पूर्वक समाधान करने का आश्वासन दिया। महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव हरि प्रकाश गुप्ता ने अबेकस को विद्यार्थियों के हित में बताया।
कार्यशाला में शिक्षकों ने सवाल पूछे। प्राचार्या डॉ. शर्मिला शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. ममता श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय छर्रा के प्राचार्य डॉ. शशि कपूर, आरडी महाविद्यालय हाथरस की प्राचार्या डॉ. इंदु वार्ष्णेय, डॉ. लकी गुप्ता, डॉ. हरेंद्र कुमार गौड़, सचिन वर्मा, डॉ. गीतिका सिंह, डॉ. कृष्णा वाजपेयी, डॉ. संगीता कुमार, डॉ. नीता वार्ष्णेय, डॉ. विनीति गुप्ता, डॉ. हेमलता अग्रवाल, डॉ. मोनिका, डॉ. सपना सिंह, डॉ. आरती गहरवार, डॉ. मंजू यादव, डॉ. नीरू यादव आदि मौजूद रहे।
ये है एबीसी
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) एक वर्चुअल स्टोर हाउस है, जिसमें हर विद्यार्थी का रिकॉर्ड होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय व महाविद्यालय को इस योजना में पंजीकरण कराना होगा। ऐसे में अगर कोई विद्यार्थी किन्हीं कारणों से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे संबंधित कोर्स के टाइम पीरियड के हिसाब से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री दी जाएगी। मिसाल के तौर पर प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने वाले को सर्टिफिकेट, द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण को एडवांस डिप्लोमा व तीन साल का कोर्स पूरा करने पर ग्रेजुएशन की डिग्री दी जाएगी। चार साल की पढ़ाई करने पर रिसर्च के साथ डिग्री दी जाएगी।