सरस्वती विद्या मंदिर के वार्षिक समारोह में छात्रों के बदले बुजृुर्गों एवं अन्य लोगों को देखकर राज्यपाल अपने आप को रोक नहीं पाए।
उन्होंने आयोजकों से पूछा कि छात्रों के कार्यक्रम में छात्र कम और बुुुुुुजुर्ग ज्यादा क्यों दिख रहे हैं। प्रतिभा सम्मान में छात्रों का रहना जरूरी है। दूसरे छात्रों को सम्मानित होते देखकर वे भी प्रेरित होंगे। राज्यपाल द्वारा कारण पूछे जाने पर बताया गया कि स्कूल में 1200 छात्र हैं। प्रशासन ने सिर्फ 200 छात्रों को ही बुलाने की अनुमति दी थी। इसलिए यहां छात्रों की संख्या कम दिख रही है।
इसपर नाराज राज्यपाल ने मंच से कहा कि वे प्रशासन से पूछेंगे कि ऐसा क्यों किया गया।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब राज्यपाल हेलीपैड पर जा रहे थे, उस समय उन्होंने कमिश्नर चंद्रकांत एवं डीआईजी गोविंद अग्रवाल से जवाब-तलब किया। छात्रों को रोकना गलत है। कमिश्नर एवं डीआईजी ने सफाई देते हुए कहा कि कार्यक्रम में कौन और कितने लोग उपस्थित होंगे यह कॉलेज प्रशासन ने ही तय किया था।
प्रशासन का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था। राज्यपाल ने हेलीकॉप्टर में बैठते समय कार्यक्रम संयोजक चौ. ऋषिपाल सिंह को इशारे से बुुलाया और कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई दी। साथ ही कहा कि अगली बार बुलाओगे तो फिर आऊंगा, लेकिन छात्रों के कार्यक्रम में छात्र, शिक्षक और अभिभावकों का होना बहुत जरूरी है।