देश की राजनीति की दिशा तय करने में छात्र शक्ति की भूमिका को निर्णायक बताते हुए विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ चुनाव की बहाली की पुरजोर वकालत की। राजनीति में छात्रों की अहम भूमिका विषय पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला और राजनीति की नर्सरी हैं। यहां से निकले युवा मंत्री, सांसद और मुख्यमंत्री जैसे सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं।
रविवार को अमर उजाला संवाद में अलग-अलग छात्र संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। बहुजन विद्यार्थी एकता संघ (बीवीईएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गगन कुमार ने कहा कि युवाओं से सरकारें डर रही हैं। इसलिए छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहा है।
महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रों के समक्ष समस्याएं हैं, उसका समाधान छात्र ही करा सकते हैं। मीडिया प्रभारी मनोज कुमार ने कहा कि छात्रों की समस्याओं से खिलवाड़ हो रहा है। सदस्य किंशु भारती ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव के लिए आवाज उठाना जरूरी है। सदस्य विजय कुमार ने कहा कि जब युवा आगे आएंगे तभी देश प्रगति करेगा। सदस्य रवि किशन ने कहा कि राजनीति में युवाओं को आगे आने की जरूरत है।
एबीवीपी के पूर्व जिला संयोजक शुभम शर्मा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव होना चाहिए, जिससे वह आगे चलकर देश के निर्माण में एक रूपरेखा तैयार कर सकें। डीएस कॉलेज के छात्र इकाई के अध्यक्ष शिवानी सिंह ने कहा कि छात्रों के लिए छात्रवृत्ति अहम मुद्दा है।
छात्र पढ़ेगा, देश बढ़ेगा। पेपर लीक जैसे मुद्दे युवाओं के सपने को तोड़ रहे हैं। सपा छात्रसभा के प्रदेश सचिव अजीम अब्बासी ने कहा कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव होना चाहिए, जिसमें छात्र नेतृत्व निकलेगा।
सयुस के महानगर अध्यक्ष आमिर आबिद ने कहा कि देश और प्रदेश की उन्नति में युवाओं को आगे आना चाहिए। एबीवीपी के पूर्व प्रदेश मंत्री बलदेव चौधरी सीटू ने कहा कि देश की उन्नति-प्रगति में में युवाओं की भूमिका अहम है। एनएसयूआई के अध्यक्ष आकाश मसीह ने कहा कि देश में छात्रों की आवाज दबाई जा रही है। संवाद में शिवम सिंह राना, तरुण कुमार वाल्मीकि, शैजी अब्बास, सुमंत प्रताप सिंह, नितेश कुमार, ललित चौधरी, दीपक चौधरी, मुकेश कुमार, अलंकार शर्मा, अभिषेक सिंह आदि मौजूद रहे।