- डॉ. जाकिर हुसैन (1963)
- खान अब्दुल गफ्फार खान (1983)
पद्मविभूषण
- डॉ. जाकिर हुसैन (1954)
- हाफिज मोहम्मद इब्राहिम (1967)
- सैयद बशीर हुसैन जैदी (1976)
- प्रो. आबिद सिद्दीकी (2006)
- प्रो. राजा राव (2007)
- प्रो. एआर किदवई (2010)
पद्मभूषण
- शेख मोहम्मद अब्दुल्लाह (1964)
- प्रो. सैयद जहूर कासिम (1982)
- प्रो. आले अहमद सुरुर (1985)
- नसीरुद्दीन शाह (2003)
- प्रो. इरफान हबीब (2005)
- कुर्रातुल एन हैदर (2005)
- जावेद अख्तर (2007)
- डॉ. अशोक सेठ (2014)
पद्मश्री- विश्वविद्यालय के 50 से ज्यादा पूर्व छात्र-छात्राओं को पद्मश्री मिल चुका है।
ज्ञानपीठ
- कुर्रतुलऐन हैदर (1989)
- अली सरदार जाफरी (1997)
- प्रो. शहरयार (2008)
सुप्रीम कोर्ट के जज
- जस्टिस बहारुल इस्लाम
- जस्टिस सैयद मुर्तजा फजल अली
- जस्टिस एस. सगहीर अहमद
- जस्टिस आरपी सेठी
हाईकोर्ट के 47 जज
ये भी रहे छात्र
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा, अब्दुल्ला शेख मोहम्मद, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, राही मासूम रजा, शकील बदायूंनी, शायर जावेद अख्तर, फिल्म अभिनेता नसीरउद्दीन शाह आदि।
बच्चों को स्कूल से ही राष्ट्र भावना से प्रेरित पाठ्यक्रम पढ़ाना चाहिए, लेकिन इस तरह की व्यवस्था स्कूलों में नहीं है। जब वह समझ जाएंगे तो ऐसी गलतियां नहीं कर सकते। इंतजामिया को भी छात्रों से बीच-बीच में फीड बैक लेना चाहिए। रही बात फैजान की, तो हो सकता है कि वह खेल तमाशे और नादानी में कोई हरकत कर गया हो, यह तो जांच का विषय है। -प्रो. मुफ्ती जाहिद अली, पूर्व विभागाध्यक्ष सुन्नी थियोलॉजी, एमएयू
एएमयू प्रशासन को जिस तरह विद्यार्थियों को समझाना चाहिए, उसमें नाकाम है। विद्यार्थियों को बिगड़ने का मौका दिया जाता है। नए छात्र गलत लोगों के चक्कर में फंस जाते हैं। दिन-रात ढाबों पर सैकड़ों की तादाद में छात्र बैठे रहते हैं। कभी इनसे इंतजामिया नहीं पूछती, यहां क्यों बैठे हो? इस पर फिक्र करनी होगी। वर्ना, इसी तरह एएमयू को बदनाम होते रहना पड़ेगा। -प्रो. शमीम अहमद, पूर्व प्राचार्य, वीमेंस पॉलिटेक्निक, एएमयू