अलीगढ़ के मथुरा रोड स्थित गांव सिंघारपुर में बंद ईंट भट्ठे की ऊसर जमीन 26 साल में चमन हो गई। ऊसर जमीन पर 1999 में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने शाखा लगाना शुरू किया था। किसी तरह जगह को समतल करके खेलने लायक बनाया गया। इसी जमीन पर 10 हजार लोगों का खिचड़ी सहभोज का आयोजन किया, जिसके लिए आसपास के गांव के लोगों ने ही चावल एकत्र किए। बाद में यहां केशव सेवा धाम की स्थापना हुई और आज यह गांव चमन हो गया।
सिंघारपुर में ईंट भट्ठा बंद होने के बाद जमीन ऊसर हो गई और इलाके में जंगल होने के कारण लोग रात में गांव में जाने में भी डरते थे। उस समय आरएसएस के महानगर प्रचारक वेद प्रकाश थे। उनके प्रयास से इस जमीन पर शाखा लगाना शुरू किया गया। धीरे-धीरे संघ के कार्यक्रम यहां होने लगे। इसी जमीन पर मकर संक्रांति का खिचड़ी सहभोज कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके लिए सिंघारपुर समेत आसपास के गांव के लोगों ने भी दाल और चावल दिए। करीब 10 हजार लोगों का सहभोज हुआ। गांव में स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ गई। इसी दौरान आगरा में संघ का सबसे बड़ा 75 हजार स्वयंसेवकों का तीन दिन का शिविर लगा, जिसमें गांव से पूर्ण गणवेशधारी 10 स्वयंसेवक शामिल हुए।
2004 में जब हरिगढ़ विभाग में कन्हैया लाल विभाग प्रचारक थे, तब कासिमपुर में चल रहे केशव सेवाधाम को इस स्थान पर स्थापित करने की योजना बनाई गई। इसके लिए 2005 में जमीन खरीदी गई। 2007 में संघ के प्रचारक रहे ब्रह्मदेव शर्मा भाईजी ने केशव सेवाधाम का शिलान्यास किया। केशव सेवाधाम के साथ यहां सीबी गुप्ता सरस्वती विद्यापीठ की स्थापना हुई। धीरे-धीरे यह स्थान संघ की गतिविधियों का महत्वपूर्ण स्थान बन गया। संघ के बड़े आयोजन यहां होने लगे। बाद में यहां विभाग प्रचारक रहे रामस्नेही के प्रयास से यहां डॉ. शन्नोरानी सरस्वती कन्या महाविद्यालय स्थापित किया गया। ऐसा पहली बार है जब संघ के सरसंघचालक का यहां प्रवास हुआ है।
26 साल पहले तक गांव सिंघारपुर की जमीन ऊसर थी। संघ की गतिविधियां यहां प्रारंभ हुईं। बाद में केशव सेवाधाम, सीबी गुप्ता सरस्वती विद्यापीठ और डॉ. शन्नोरानी सरस्वती कन्या महाविद्यालय यहां स्थापित हुए। सिंघारपुर अब संघ के बड़े केंद्र के रूप में प्रख्यात है। सौभाग्य की बात है कि सरसंघचालक मोहन भागवत यहां प्रवास पर आए हैं।- डॉ. राजीव वार्ष्णेय, प्रबंधक, सीबी गुप्ता सरस्वती विद्यापीठ