लोधा में प्रस्तावित राज्य विश्वविद्यालय की जमीन अवैध शीरदारी (जमीदारी प्रथा खत्म होने के बाद हुए पट्टे) पट्टों के झंझावत में फंस गई है। जांच में पता चला है कि समूचे लोधा में वर्ष 1976 में 105 लोगों ने करीब 165 बीघा ग्राम समाज की जमीनों पर लेखपाल से सेटिंग कर शीरदारी पट्टा दर्ज करा लिया था। इसमें राज्य विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित बंजर जमीन का नंबर भी शामिल है। इस प्रकरण के खुलासे से अफसरों में हड़कंप मच गया है। डीएम ने एसडीएम कोल को लोधा में सभी चकबंदी एवं मूल बंदोबस्त के आधार पर हुए जमीनों के हस्तांतरण प्रकरणों की जांच के आदेश दिये हैं। फर्जीवाड़ा पाए जाने पर आरोपियों को नोटिस जारी किये जाएंगे और इसके बाद यह जमीनें ग्राम समाज में निहित कर दिया जाएगा।
यह है मामला
लोधा में राज्य विश्वविद्यालय निर्माण के लिए भूमि का चिन्हांकन किया गया है। जब इस जमीन की जांच की गई तो पता चला कि इसमें से 54 नंबर की जमीन पर करीब 30-40 लोगों ने अवैध रूप से शीरदारी पट्टे दर्ज करा रखे हैं। पत्रावलियां खंगाली गई तो वह गायब मिली। यह भी पता चला कि समूचे लोधा में वर्ष 1976 में तत्कालीन लेखपाल से सेटिंग कर करीब 105 लोगों ने फर्जी प्रविष्टि के जरिये 165 बीघा जमीन के शीरदारी पट्टे कराये हैं। इन पट्टों पर न तहसीलदार, न एसडीएम और न ही कानूनगो के हस्ताक्षर हैं।
लेखपाल ने मनमाने तरीके से इन पट्टों को दर्ज किया है। यह भी पता चला कि कुछ अनुसूचित जाति के लोगों ने वर्ष 2002 में इन जमीनों को अपने को अनुसूचित न दिखाकर सामान्य वर्ग के लोगों को बेच दिया है। बिना अनुुमति हुई इस बिक्री के मामले में वर्ष 2008 में न्यायालय ने इन सभी अवैध तरीके से बेची गई जमीनों को राज्य सरकार में निहित करते हुए ग्राम सभा को देने के आदेश दिये। लेकिन इन पत्रावलियों को दबा दिया गया और इस आदेश को खतौनी में नहीं चढ़ाया गया।
अब तक पकड़े जा चुके हैं पांच प्रकरण
एसडीएम कोल ने बताया कि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा जमीनें खरीदने के बाद अपने को सामान्य वर्ग का दर्शाकर जमीनों को सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को बेचने के अब तक पांच प्रकरण सामने आए हैं। इन प्रकरणों की जद में करीब एक हेक्टेयर जमीन है।
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जिलाधिकारी ने लोधा में जितनी भी चकबंदी और मूल बंदोबस्त के आधार पर जमीनों के हस्तांतरण के सभी मामलों की जांच के आदेश दिये हैं। जांच में फर्जी हस्तांतरण एवं अवैध शीरदारी पट्टे के मामले पाए गए तो आरोपियों को नोटिस जारी किये जाएंगे। सभी फर्जी हस्तांतरण व पट्टे वाली जमीनों को राज्य सरकार में निहित करते हुए इन्हें ग्राम सभा के नाम चढ़वा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद राज्य विश्वविद्यालय के लिए और भी जमीन मुहैया हो जाएगी।
रंजीत सिंह, एसडीएम कोल