तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का जुलूस सोमवार को कलेक्ट्रेट के गेट तक पहुंचना था, लेकिन पुलिस प्रशासन ने इतना तगड़ा इंतजाम किया कि एक भी नेता कलेक्ट्रेट के इर्दगिर्द तक नहीं पहुंच सका। सभी का धरना प्रदर्शन कलेक्ट्रेट से 500 मीटर पहले तस्वीर महल पर ही समेट दिया गया। नेता यहां के राजा महेंद्र प्रताप सिंह पर धरना प्रदर्शन करते हुए मोदी और योगी सरकार को कोसते रहे।
जिला प्रशासन ने किसान सेना, भारतीय किसान यूनियन भानु गुट, हरपाल गुट, कांग्रेस व सपा नेताओं को घर से नहीं निकलने नहीं दिया। अधिकांश नेताओं को उनके घरों पर नजरबंद कर दिया गया था। 100 से ज्यादा किसान नेता घरों और खेतों में ही नजरबंद कर दिए गए। भानु गुट के कार्यकर्ताओं ने महेंद्र सिंह पार्क में भूख हड़ताल की।
हरपाल गुट के नेताओं ने इगलास और गोंडा में धरना दिया। टिकैत यूनियन को मिलाकर 13 किसान यूनियनों के संयुक्त मोर्चा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनरतले उद्यान विभाग के परिसर में धरना प्रदर्शन हुआ। इस दौरान सभी ने एक स्वर में तीनों कृषि कानूनों की भर्त्सना की। राष्ट्रपति से किसान आयोग के गठन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों के सभी उत्पाद खरीदे जाने की व्यवस्था के लिये केंद्र सरकार को आदेशित करने की मांग की गई। दोपहर करीब ढाई बजे पुलिस की टोका-टोकी के मध्य कार्यकर्ता डीएम को ज्ञापन देने के लिये कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। इसको लेकर पुलिस से नोंकझोंक हो गई।
सूचना पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने कलक्ट्रेट के गेट पर ज्ञापन लेकर स्थिति को संभाला। धरना देने वाले संगठनों में भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष विमल तोमर, भाकियू महाशक्ति जिलामंत्री सुरेश चंद, अखिल भारतीय किसान सभा के योगेश्वर सिंह चौहान, अखिल भारतीय किसान सभा दो के सूरजपाल, बेरोजगार मजदूर किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मोर्चा के कैलाश वर्मा, एआईसीसीटीयू उत्तर प्रदेश, निर्माण श्रमिक संगठन के जेके शर्मा, राष्ट्रीय मूल निवासी महिला संघ के कमलेश यादव, मानव सेवादल संस्थान के केबी मौर्य, पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज की नीलम राही, भाकियू हरपाल के ठा.नरेंद्र सिंह, भाकियू अंबावता गुट केे जिलाध्यक्ष विनोद सिंह आदि उपस्थित थे।
भाकियू भानु गुट के जितेंद्र सिंह समेत आधा दर्जन कार्यकर्ताओं ने महेंद्र सिंह पार्क में भूख हड़ताल की। महेंद्र प्रताप सिंह पार्क पर सपाइयों ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया। सपा के पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह को उनके स्वर्णजयंती नगर पर ही रोक दिया गया। कांग्रेस के रेल रोकने के एलान पर नेताओं व कार्यकर्ताओं को मोबाइल की लोकेशन से तलाशा गया लेकिन वह जिला कार्यालय पहुंच गए थे। उनको वहीं पर रोक दिया गया। सभी ने एसीएम को ज्ञापन दिया। धरना प्रदर्शन शांति से निपटने पर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। जिले में गभाना और मडराक टोल पर कड़ी सुरक्षा रही। कलेक्ट्रेट से पहले तस्वीर महल, शमशाद मार्केट, ठंडी सड़क पर बैरीकेडिंग लगाई गई थी। आरएएफ व पीएसी और पुलिस बड़ी संख्या तैनात रही।
100 से ज्यादा किसान नेता किए नजरबंद
अलीगढ़। किसान आंदोलन को लेकर सतर्क प्रशासन व पुलिस ने किसान नेताओं को घरों में ही नजरबंद कर दिया गया। कुछ नेता और कार्यकर्ता जरूर पुलिस को चकमा देकर जिला मुख्यालय पहुंचने में सफल रहे। भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष विमल तोमर ने बताया कि पुलिस ने उनके कुराना स्थित आवास पर घेरा डाला था, लेकिन वे पीछे के रास्ते अलीगढ़ आए। उनके मीडिया प्रभारी मुस्तकीम पठान, गुलजार बापू, जगदीश यादव समेत सात नेता नजरबंद किए गए।
इसके अलावा डीएम कार्यालय का घेराव करने जा रहे भाकियू किसान सेना के प्रदेश सचिव मो.शमी, जिलाध्यक्ष नौमान आलम, मंडल अध्यक्ष जितेंद्र यादव, अफरोज खान, विष्णु यादव समेत करीब 45 कार्यकर्ता नजरबंद रहे। भाकियू भानु के प्रदेश महासचिव डा.शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि उनके संगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रेमपाल सिंह समेत 50 पदाधिकारी व कार्यकर्ता नजरबंद किए गए। भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ.हरपाल सिंह ने बताया कि उनके संगठन के दर्जनभर से अधिक नेता पुलिस ने खेत एवं घरों पर नजरबंद कर दिए थे।