पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार भाइयों ने पुलिस को बताया है कि नीतेश पांडेय उन्हें डीएलएड परीक्षा के पेपर आउट कराकर उपलब्ध करा रहा था। यह कौन है और कैसे इनके संपर्क में आया, पुलिस इसकी जांच कर रही है। नीतेश पुष्पेंद्र को पेपर भेजता था। धर्मेंद्र सॉल्व कर उन्हें देता। धर्मेंद्र ने बताया कि उसे इस कार्य के बदले में 50000 रुपये मिले हैं। पुष्पेंद्र पैसे नीतेश को भेजता था।
आरोपी गिरफ्तार, मुकदमा भी दर्ज, जिम्मेदार बोले हमें पता ही नहीं
अलीगढ़ जिले के छह केंद्रों पर कराई हुई डीएलएड की परीक्षा में इगलास से पकड़े गए दो सॉल्वरों को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) गिरफ्तार कर ले गई। थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ। हैरानी की बात यह है कि इसके विषय में परीक्षा संचालित करने वाली संस्था जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के अधिकारियों को कुछ पता ही नहीं। जबकि परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परीक्षा संपन्न कराने की जिम्मेदारी इसी संस्था की है। खास बात यह है कि अलीगढ़ के किसी भी अफसर को इस विषय में जानकारी नहीं है। जब डायट के अधिकारियों और प्रशासन के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने इस घटना के विषय में जानकारी नहीं होने की बात कही। ऐसे में विचारणीय प्रश्न यह है कि किसी परीक्षा के सॉल्वर पकड़े जाते हैं, स्थानीय तंत्र उदासीन रहता है।
डीएलएड की परीक्षा में जिले के 6 परीक्षा केंद्रों पर 2600 परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। 28 अक्तूबर से 3 नवंबर तक परीक्षा आयोजित हुई। अब इस परीक्षा में सॉल्वर पकड़े जाने के बाद जिले के इन परीक्षार्थियों की परीक्षा पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। इनके द्वारा दी गई परीक्षा का भविष्य क्या होगा, यह स्वयं नहीं जानते।
क्या कहते हैं अधिकारी
परीक्षा में सॉल्वर गैंग पकड़े जाने की कोई जानकारी नहीं है। न पेपर आउट होने की कोई जानकारी है। इसके अलावा पेपर के रद होने के संबंध में भी कोई जानकारी नहीं है। - सुखदेव सिंह, डीएलएड परीक्षा प्रभारी
सॉल्वर पकड़े जाने या पेपर आउट होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। - डॉ. विपिन वार्ष्णेय, केंद्र व्यवस्थापक, डीएवी इंटर कॉलेज