बड़े भाई सुभाष के साथ बहन दीपमाला
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हर रक्षाबंधन पर भाई, बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। बहन, भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। भाई उसे रक्षा करने के वचन के साथ तोहफा भी देता है। बदलते परिवेश व समय के साथ बहुत कुछ बदल रहा है लेकिन भाई-बहन के रिश्तों की मिठास कभी कम नहीं हो पाई है। गभाना की दीपमाला ने अपनी किडनी देकर भाई को जीवन का उपहार दिया है।
तहसील गभाना के गांव दौरऊ की दीपमाला जादौन के परिवार को वर्ष 2015 में खुशियों को ग्रहण सा लग गया। 57 वर्षीय बड़े भाई सुभाष सिंह का अचानक से स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। काफी इलाज कराने के बाद भी जब उन्हें कोई फायदा न हुआ तो परिजन उन्हें दिल्ली के निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे। यहां पर डाॅक्टरों ने बताया कि सुभाष की दोनों ही किडनी खराब हो चुकी हैं। तीन साल तक नियमित डायलिसिस से जब उन्हें कोई राहत नहीं मिली तो छोटी बहन 32 वर्षीय दीपमाला ने हिम्मत दिखाई और भाई की जिंदगी बचाने के लिए आगे आई।
परिजनों ने दीपमाला को रोका। समझाया कि तुम बेटी हो शादी के बाद दूसरे घर भी जाना है। दीपमाला जिद पर अड़ गई। जुलाई 2020 में दीपमाला ने अपनी किडनी देकर भाई की जिंदगी बचा ली। पिछले पांच साल से दोनों भाई-बहन पूरी तरह से स्वस्थ हैं। दीपमाला के बड़े भाई सुभाष सिंह का कहना है कि बहन ने किडनी देकर जीवनदान के रूप में उन पर बडा उपकार किया है। तीन भाई व तीन बहनों में सुभाष सबसे बड़े व दीपमाला सबसे छोटी हैं।
नहीं की शादी, खुद को समाजसेवा में झोंका
दीपमाला ने भाई को किड़नी देने के साथ ही अपने जीवन का अहम फैसला भी लिया। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने और शादी न करने का निर्णय लिया। फिर खुद को अध्यात्म और समाज सेवा की ओर मोड़ लिया। वे रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर समेत तमाम तरह के सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़कर भाग लेती हैं और समय-समय पर ग्रामीणों की मदद करने में भी पीछे नहीं रहती हैं।