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Aligarh: श्रीकृष्ण-बलदाऊ के पड़े थे अचल सरोवर पर चरण, आने वाले दिनों में दिखेगा और भव्य

Mon, 23 Jan 2023 05:05 AM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा

सार

अलीगढ़ में अचल सरोवर पर द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के चरण पड़े थे। इसलिए अचल सरोवर मंदिरों से घिरता गया। यहां 100 से अधिक छोटे बड़े मंदिर हैं।
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अचलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ में पौराणिक अचल सरोवर की धार्मिक मान्यताएं हैं। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के यहां चरण पड़े थे। इसलिए अचल सरोवर मंदिरों से घिरता गया। यहां 100 से अधिक छोटे बड़े मंदिर हैं। जिससे यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में स्मार्ट सिटी के तहत सरोवर को संवारा और सजाया जा रहा है। आगामी दिनों में सरोवर भव्य और दिव्य दिखेगा। यहां भगवान भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा अचल ताल में विराजमान हैं। इसके चारों ओर परिक्रमा मार्ग बनाया जा रहा है। यह हरियाली से भी भरपूर रहेगा। इससे आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाएगी।

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कोलासुर राक्षस के अत्याचार से दिलाई थी मुक्ति 
द्वापर युग में अलीगढ़ में कोलासुर नामक राक्षस का बहुत अत्याचार था। भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ अलीगढ़ आए थे। उस समय अलीगढ़ का नाम कोल था। अचल सरोवर स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर अचलेश्वरधाम के पास विशाल टीला था, वहां पर उन्होंने विश्राम किया था। कोलासुर राक्षस के अत्याचार से पूरा कोल भयभीत था। नगरवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को इस बारे में बताया और प्रार्थना की। प्रभु कोलासुर राक्षस हम सभी को बहुत परेशान कर रहा है। इस पर बलरामजी को क्रोध आ गया। उन्होंने कोलासुर को ललकारा। दोनों में भंयकर युद्ध हुआ। अंत में बलरामजी ने अपने हल से कोलासुर का वध कर दिया। कोल नगरवासी हर्षित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम जी की जय-जयकार होने लगी। 

प्रभु के चरण से धन्य हुई धरती 
भगवान श्रीकृष्ण और बलरामजी के पांव पड़ने से कोल की धरती धन्य हो गई। अचलेश्वरधाम मंदिर के पास विशाल सरोवर था। धीरे-धीरे सरोवर की मान्यता भी बढ़ती चली गई। अलीगढ़ के इतिहासकारों के अनुसार महाभारत काल में अज्ञातवास के समय युधिष्ठिर के दोनों छोटे भाई नकुल और सहदेव ने सरोवर में आकर स्नान भी किया था। सरोवर की मान्यता बढ़ने के साथ  ही यहां धार्मिक आयोजन शुरू हो गए। रमणीय स्थल होने के चलते सरोवर के चारों ओर मंदिरों की स्थापना होने लगी। वर्तमान में सिद्धपीठ अचलेश्वरधाम और श्री गिलहराज मंदिर यहां स्थापित है। अचलेश्वर धाम मंदिर में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। 500 साल पहले मराठाओं ने इस मंदिर का भव्य निर्माण कराया था। इसके बाद मंदिर का विस्तार होता चला गया। श्री गिलहराज मंदिर हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां हनुमानजी गिलहरी के रूप में विराजमान है। भक्तों पर उनकी असीम कृपा बरसती है। नौ देवी मंदिर, दाऊजी मंदिर, गायत्री मंदिर, गौरा देवी और नटराज आदि मंदिर हैं। 

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