मौसम की बेरुखी का असर शेखा झील पर भी दिख रहा है। इस बार झेल में साइबेरियन सहित अन्य विदेशी पक्षियाें की संख्या दूसरे वर्षों के मुकाले कम आए हैं। कॉमन सेल डक ने तोे अब तक इधर का रुख भी नहीं किया है। जबकि हर वर्ष इनदिनों अत्याधिक सर्दी पड़ने पर यहां मेहमान पक्षियाें की भारी भीड़ लगी रहती थी। पौ फटते ही उनकी आवाज से झील गूंजने लगती थी।
हालांकि इस बार भी मेहमान पक्षी झील में डेरा डाले हुए हैं, पर संख्या और वर्षों की तुलना में कम है। अब तक मात्र आधा दर्जन ही विदेशी एवं अन्य प्रजाति के परिंदे झील तक पहुंचे हैं। इस समय अन्य वर्षों की तुलना में तापमान अधिक है। जबकि मेहमान पक्षी यहां सर्द मौसम का आनंद लेने आते हैं।
इसके चलते यहां आने वाले पक्षी प्रेमियों की संख्या पर भी असर पड़ा है। झील के टिकट कलेक्टर कल्याण सिंह ने बताया कि अन्य वर्षों में इन दिनों पर्यटकाें की भीड़ उमड़ पड़ती थी। इसके कारण टिकट वितरण के लिए दो लोगों को लगाना पड़ता था। वन्यकर्मी इहशाक ने बताया कि इस वर्ष अब तक विदेश से कॅामन सेल डक नहीं आई हैं।
इस बार ब्रह्मणी सेल डक (चकवा-चकवी), ग्रेलक गूज (राजहंस), बार हैडेड गूज, कॉमन टील, पेंटिल, सौबलर, मलार्ड टील, मलार्ड, रेड पौचर्ड, गार्गिनी आदि विदेशी परिंदे की संख्या भी कम है। वहीं देसी पक्षी स्पांट बिल डक, कांबी डक (नकटा), डार्टर, पेंटेड स्टार्क, ओपन बिल स्टार्क, पुलपुल मूरहैन, ब्लैक नेक स्टार्क, लिटिल कोरमोरेंट, ग्रे हीरोन, पर्पल मूरहैन, लिटिल ग्रेब की संख्या भी अन्य वर्षों की तुलना में कम है।