अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक स्वरूप के मामले में केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जाहिर किए गए रुख से एएमयू में भारी नाराजगी है। नाराज शिक्षक एवं छात्र नेताओं ने जरूरत पड़ने पर कड़ा रुख अपनाने की भी चेतावनी दी है। कई केंद्र सरकार के रवैये को राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया है।
मालूम हो कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप के मामले को लेकर सुनवाई शुरू हुई। इसमें केंद्र सरकार ने एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली यूपीए सरकार की याचिका को वापस लेने का आग्रह किया है।
सरकार का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष सरकार किसी धर्म विशेष के संस्थान को पोषण नहीं कर सकती। अगली सुनवाई 4 अप्रैल को है। मंगलवार को कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने आनन-फानन में यूनिवर्सिटी कोर्ट, एग्जीक्यूटिव काउंसिल, एकेडमिक काउंसिल और विश्वविद्यालय के अन्य संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में श्री शाह एवं सह कुलपति सैयद अहमद अली ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर आस्था है। उन्होंने इस केस की पुख्ता तैयारी कर रखी है और 4 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से एएमयू का पक्ष रखा जाएगा। बैठक में मौजूद शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में कुलपति को भरोसा दिलाया कि वे इस मसले पर एक हैं।
इस बारे में नाराजगी जताते हुए इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के सचिव एवं एएमयू के प्रोफेसर इशरत आलम ने कहा कि भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इस पार्टी का हमेशा एएमयू के प्रति विरोधी रुख रहा है। नई सरकार अपनी पुरानी नीति पर चल रही है। एएमयू के छात्र नेता लियाकत अली का कहना है कि यदि एएमयू को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जा नहीं दिया जा सकता तो फिर जामिया मिल्लिया एवं सेंट स्टीफेंस कॉलेज को कैसे यह दर्जा मिला हुआ है। एएमयू में पांचों वक्ता की अजान होती है।
यूनिवर्सिटी खुलने पर हो सकते हैं विरोध प्रदर्शन ः विश्वविद्यालय प्रशासन को लगता है कि यूनिवर्सिटी खुलने के बाद केंद्र के खिलाफ विरोधी-प्रदर्शन का दौर शुरू हो सकता है। इसके मद्देनजर कई जरूरी आदेश दिए गए हैं।