बेटियां किसी से कम नहीं होतीं लेकिन इनमें से भी कुछ ऐसी होती हैं, जो उदाहरण बन जाती हैं, ऐसी ही कस्बा की जशोदा, जो अपने जीवन को दरकिनार कर परिवार की पालनहार बन गई है। दो बहनों की शादी करने के साथ ही वह छोटे भाई-बहन की परवरिश कराने के साथ ही बृद्ध बीमार पिता की देखभाल में अपने को लगा रखा है।
सराय बाजार के रहने वाले किशननाल गौतम की पांच संताने हैं, जिनमें दो बेटे तथा चार बेटियां हैं। पत्नी का पांच वर्ष पूर्व निधन होने के साथ ही परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ गिर गया है। किशनलाल अस्थमा की बीमारी से प्रभावित होने के कारण कोई काम नहीं कर पाते। बड़ा बेटा कस्बा में कपड़े की दुकान पर सेल्समेन के रूप में परिवार को थोड़ा-बहुत सहारा दे पाता है। इन हालातों में उनकी बड़ी बेटी जशोदा ने एक निजी स्कूल में शिक्षण कार्य करते रहने के साथ ही खुद पढ़ाई की तथा छोटे भाई-बहनों को भी पढ़ने में सहयोग दिया।
वर्ष 2021 में उसकी मेहनत रंग लाई और उसकी बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल में नौकरी लग गई। नौकरी लगने के बाद उसने अपनी छोटी बहन प्रीती की शादी 15 जुलाई 2024 को तथा उससे छोटी बहन हेमा की शादी 18 नवंबर 2025 में कर दी है। सबसे छोटी बहन धारवी की पढ़ाई करा रही है, वहीं पिताजी का इलाज भी करा रही है। छोटा भाई को भी पढ़ाने में मदद की अब वह लखनऊ एक निजी कंपनी में लगभग नौकरी करने चला गया है। जशोदा का कहना है कि वह परिवार के लिए समर्पित है।