संस्कृति एवं आत्मरक्षार्थ प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक राजकुमार आर्य ने कहा कि जब शस्त्र बल होता है तभी शास्त्रों की रक्षा हो पाती है। आर्य वीरदल का उद्देश्य संस्कृति रक्षा, शक्ति संचय तथा सेवा है।
गार्गी कन्या गुरुकुल भैंया-चामड़ में आयोजित सात दिवसीय संस्कृति एवं आत्मरक्षार्थ प्रशिक्षण शिविर रविवार को समापन हो गया। इस दौरान गौरव आर्य भाजपा जिलाध्यक्ष हाथरस के पिता बुद्ध सेन आर्य उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर से बालिकाओं में आत्मरक्षा के गुणों के विकास होता है। आत्मिक क्षमता भी बढ़ती है। जिससे भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव है।
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शिविर प्रशिक्षक राजकुमार आर्य ने कहा कि जब शस्त्र बल होता है तभी शास्त्रों की रक्षा हो पाती है। आर्य वीरदल का उद्देश्य संस्कृति रक्षा, शक्ति संचय तथा सेवा है। आर्य वीरांगनाओं ने व्यायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, जूडो कराटे, तलवार, लाठी, भाला, गतका, दीपक आसन, स्तूप निर्माण, कमांडो तथा आग के गोले से निकलकर आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया।
प्रतिभागी छात्राओं को शारीरिक, बौद्धिक, सेवा तथा अनुशासन के लिए पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शिविर अध्यक्ष स्वामी चेतन देव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में कीर्ति आर्या, सरस्वती आर्या, कोमल आर्या, शिवानी आर्या, चांदनी, लता, पूजा, रश्मि ने प्रशिक्षिका की भूमिका निभाई।