दिल्ली एम्स के पूर्व कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसवीएस देव
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कम उम्र में बीमारी, टूट रहे सपने
एक सवाल पर डॉ. देव ने कहा कि कम उम्र में कैंसर का पता चलना मरीज के लिए बीमारी के साथ-साथ बड़ा मानसिक आघात भी होता है। उनके मुताबिक इस उम्र में व्यक्ति ने भविष्य के लिए कई सपने देखे होते हैं। अचानक कैंसर का पता चलने पर वह तनाव और अवसाद में जा सकता है। यह बीमारी की गंभीरता से पैदा हुआ मानसिक दबाव होता है।
दूसरी स्टेज तक इलाज की अच्छी संभावना
डॉ. देव के मुताबिक कैंसर जितनी जल्दी पकड़ में आए, इलाज के परिणाम उतने बेहतर रहते हैं। स्टेज-2 तक बीमारी का पता चलने पर भी बड़ी संख्या में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। उनके अनुसार समय पर इलाज मिलने पर 80 से 90 फीसदी तक मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना रहती है।
तंबाकू फिर शुरू करना खतरनाक
इलाज के बाद कुछ मरीज दोबारा पान, तंबाकू या दूसरे नशीले उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं। यह गंभीर गलती हो सकती है। इससे शरीर के किसी दूसरे हिस्से में दोबारा कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इलाज के बाद भी तंबाकू से पूरी तरह दूरी जरूरी है।
रोकथाम का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता
तंबाकू उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है। ऐसे में लोगों को इनके खतरों के बारे में लगातार जागरूक करना जरूरी है। खासकर युवाओं को तंबाकू और गुटखे की शुरुआत से ही दूर रखना होगा।