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सावधान: तंबाकू ही नहीं, नुकीला दांत भी कर सकता है मुंह में कैंसर का रास्ता तैयार, डॉ एसवीएस देव ने बताया यह

Sat, 12 Sep 2026 02:21 PM IST
Chaman Kumar Sharma दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

वर्तमान में दिल्ली के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल साकेत में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. देव ने बताया कि मुंह में होने वाला हर छाला कैंसर नहीं होता। लेकिन यदि कोई छाला लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है या सफेद अथवा लाल धब्बा बना हुआ है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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नुकीला दांत - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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मुंह के कैंसर का नाम आते ही तंबाकू, गुटखा और पान मसाले का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपको पता है कि मुंह में लगातार चुभता या रगड़ता हुआ नुकीला दांत भी खतरा बढ़ा सकता है? ठीक से फिट न होने वाला डेंचर या इंप्लांट के बाद जीभ और गाल से लगातार होने वाला घर्षण भी मुंह के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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शुक्रवार को शहर आए दिल्ली एम्स के पूर्व कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसवीएस देव ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मुंह के कैंसर के लिए तंबाकू बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन इसे एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। मुंह में लगातार होने वाला घर्षण भी समस्या पैदा कर सकता है। खराब या नुकीले दांत, ठीक से फिट न होने वाला डेंचर और इंप्लांट के बाद जीभ या गाल से बार-बार टकराने वाला दांत लगातार चोट का कारण बन सकता है।
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वर्तमान में दिल्ली के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल साकेत में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. देव ने बताया कि मुंह में होने वाला हर छाला कैंसर नहीं होता। लेकिन यदि कोई छाला लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है या सफेद अथवा लाल धब्बा बना हुआ है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी कराना जरूरी हो सकता है। उन्होंने बताया कि समय पर जांच बहुत जरूरी है और इसके लिए हर महीने के चौथे शनिवार को शहर के हीरालाल हॉस्पिटल में दिल्ली से विशेषज्ञ आएंगे।

दिल्ली एम्स के पूर्व कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसवीएस देव - फोटो : संवाद
कम उम्र में बीमारी, टूट रहे सपने
एक सवाल पर डॉ. देव ने कहा कि कम उम्र में कैंसर का पता चलना मरीज के लिए बीमारी के साथ-साथ बड़ा मानसिक आघात भी होता है। उनके मुताबिक इस उम्र में व्यक्ति ने भविष्य के लिए कई सपने देखे होते हैं। अचानक कैंसर का पता चलने पर वह तनाव और अवसाद में जा सकता है। यह बीमारी की गंभीरता से पैदा हुआ मानसिक दबाव होता है।

दूसरी स्टेज तक इलाज की अच्छी संभावना
डॉ. देव के मुताबिक कैंसर जितनी जल्दी पकड़ में आए, इलाज के परिणाम उतने बेहतर रहते हैं। स्टेज-2 तक बीमारी का पता चलने पर भी बड़ी संख्या में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। उनके अनुसार समय पर इलाज मिलने पर 80 से 90 फीसदी तक मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना रहती है।
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तंबाकू फिर शुरू करना खतरनाक
इलाज के बाद कुछ मरीज दोबारा पान, तंबाकू या दूसरे नशीले उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं। यह गंभीर गलती हो सकती है। इससे शरीर के किसी दूसरे हिस्से में दोबारा कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इलाज के बाद भी तंबाकू से पूरी तरह दूरी जरूरी है।

रोकथाम का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता
तंबाकू उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है। ऐसे में लोगों को इनके खतरों के बारे में लगातार जागरूक करना जरूरी है। खासकर युवाओं को तंबाकू और गुटखे की शुरुआत से ही दूर रखना होगा।
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