अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय में सीएए-एनआरसी विरोधी धरने में देश बांटने संबंधी बयान देकर राष्ट्रद्रोह के आरोप में फंसे जेएनयू छात्र शरजिल इमाम की जमानत याचिका सत्र न्यायाधीश विवेक संगल के न्यायालय से खारिज कर दी गई है। शरजिल ने बयान जनवरी माह में दिया था, जिसका वीडियो वायरल होने पर 25 जनवरी को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी कड़ी में दिल्ली व गुवाहाटी में भी मुकदमे दर्ज किए गए थे। फिलहाल, शरजिल दिल्ली की तिहाड़ जेल में निरुद्ध है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, शरजिल इमाम पुत्र अकबर इमाम निवासी इमाम पथ मलिक टोला काको बिहार हाल निवासी जेएनयू दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी दायर की गई थी। जिस पर उन्होंने शरजिल का आपराधिक इतिहास तलब किया था। आपराधिक इतिहास आने में समय लग गया, जिसके चलते पिछले पांच-छह तारीखों पर सुनवाई टल गई।
शरजिल पर सिविल लाइंस में सब इंस्पेक्टर निजामुद्दीन की ओर से उसका बयान सोशल मीडिया व टीवी चैनलों पर वायरल होने के बाद भड़काऊ बयान देने व माहौल खराब करने और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें देश को बांटने संबंधी बयान देने का आरोप है। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से निर्दोष फंसाए जाने का आरोप लगाया गया।
मगर, अभियोजन की दलील व साक्ष्यों के साथ-साथ इसी आरोप में असोम व दिल्ली में मुकदमों सहित कुल चार अन्य मुकदमों के आपराधिक इतिहास पेश किया गया। साथ में आंध्र प्रदेश के मुकदमे का भी उल्लेख किया, जिसमें जमानत मंजूर हो चुकी है। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है। बता दें कि शरजिल पर एक साथ यह मुकदमे अलग-अलग राज्यों में दर्ज हुए। बाद में शरजिल को दिल्ली पुलिस ने पटना से गिरफ्तार किया। इसके बाद कुछ दिन दिल्ली पुलिस की अभिरक्षा में रहने के बाद उसे असोम ले जाया गया। वहां से वापस आने के बाद से वह दिल्ली जेल में है।