राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान नई दिल्ली के ज्यो हैजडर्स रिस्क मैनेजमेंट के प्रमुख प्रो. चंदन घोष ने कहा कि बाढ़ एवं तूफान की तरह भूकंप का पूर्वानुमान लगाने में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। शीघ्र ही इस शोध का सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
प्रो. घोष बुधवार को एएमयू के जेडएच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में निर्माणों की भूकंपीय सुरक्षा पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से भूकंप का खतरा बढ़ रहा है, उसके दृष्टिगत यह आवश्यक हो गया है कि नए भवनों एवं इमारतों का निर्माण भूकंप विरोधी फार्मूले के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सभी राज्यों में भूकंप आने का खतरा रहता है।
इनमें कई राज्य ऐसे हैं जो भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। उन्होंने चलती रेल गाड़ियों में स्वचालित ब्रेक द्वारा रोकने तथा बड़ी औद्योगिक सुविधाओं, गैस सप्लाई और ऊर्जा उत्पादन के आपातकालीन नियंत्रण पर केस स्टडी पेश की। आईआईटी नई दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सुरेश भल्ला ने जंग के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए कार्बोनेशन और क्लोराइड से प्रेरित जंग के बारे में बताया।
दिल्ली टेक्नालोजिकल यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. राजू सरकार ने इंडिया, चीन और बंगलादेश में भूकंप से हुई जन-धन की हानि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकारी आंकड़ाें के मुताबिक लगभग चार लाख से अधिक भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गए, जबकि 29 हजार से अधिक भवनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि भूकंप के कारण 35 बहुमंजिला इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा जो भूकंप के मानकों को सामने रखकर नहीं बनाई गई थी। कार्यक्रम को प्रो. मुमताज अहमद खान, प्रो. मुहम्मद आरिफ, प्रो. शकील अहमद, प्रो. रेहान अहमद खान, ध्रुव कुमार आदि ने संबोधित किया।