बृहस्पतिवार को जब लाइन पर ट्रेन की स्पीड ट्रायल हो रहा था, तब लाइन पार कर रहे बच्चों व शिक्षकों को आरपीएफ ने रोक दिया। यहां विवाद भी हुआ। मगर आरपीएफ ने रेलवे नियमों का हवाला देकर लाइन पार करने देने से इन्कार कर दिया। इस खबर पर राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेश चौहान बीएसए राकेश सिंह को लेकर पहुंच गए। समाधान पर चर्चा हुई, रेलवे अधिकारियों से भी बात हुई।
हमने सुरक्षा कारणों से बच्चों की लाइन पार कर आवाजाही पर रोकटोक की है। यह समस्या बृहस्पतिवार को अधिकारियों के समक्ष रखी है। इस पर उच्च स्तर पर विद्यालय को यहां से हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर भी प्रयास होगा।-डीपी सिंह, पोस्ट कमांडर आरपीएफ
बेशक स्कूल को आने-जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है, लेकिन हाजिरी शत-प्रतिशत है। बीएसए ने शुक्रवार को वहां पहुंचने पर पाया कि विद्यालय के शिक्षक व शिक्षा मित्र एक साथ खड़े होकर बच्चों को लाइन पार कराते हैं। हालांकि रेलवे ने ओवरब्रिज पर चढ़ने उतरने के लिए एक सीढ़ी स्कूल की तरफ बना दी है, इस पर रेलिंग नहीं है। दूसरी ओवरब्रिज से सड़क की ओर चढ़ने उतरने के लिए सीढ़ी नहीं है। इसलिए बच्चे व शिक्षक स्कूल से ओवरब्रिज पर चढ़कर पूरा पुल पारकर नीचे आएंगे, यह भी खतरों से भरा है।
बीएसए डा.राकेश सिंह ने बीएसए ने बतायाकि इस समस्या को वह स्वयं निजी स्तर पर देखेंगे और इसके लिए रेलवे अधिकारियों से वार्ता कर दूसरी ओर सीढ़ियां बनवाई जाएंगी, जिससे बच्चों की आवाजाही में समस्या न हो। उन्होंने कहा है कि वह इस समस्या का समाधान करेंगे। उन्होंने फेसबुक पोस्ट करते हुए इसे संकल्प केतौर पर लेने की बात कही है। शिक्षक नेता राजेश सिंह ने बताया कि पूर्व में भी यह विषय उठा था। मगर अब स्थायी समाधान निकलेगा।
ये भी जानें
- 59 बच्चे वर्तमान में विद्यालय मेंं अध्ययनरत
- 2 शिक्षिका व 2 शिक्षामित्र भी यहां कार्यरत
- 2 वर्ष से रेलवे लाइन पार करते जा रहे बच्चे
- 2 दशक से अधिक पुराने स्कूल पर है संकट