पढ़ाई-लिखाई की उम्र में स्कूली बच्चों को नशे की लत लग रही है। ग्लोबल यंग टोबैको सर्वे (2021) की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में 23 प्रतिशत स्कूली बच्चे सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। इस रिपोर्ट के बाद न सिर्फ अभिभावकों, बल्कि शिक्षकों से लेकर शासन-प्रशासन तक की चिंता बढ़ गई है। बच्चों में नशे की लत पड़ने का एक कारण स्कूलों के बाहर ही तंबाकू उत्पादों की बिक्री होना है। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा बिक्री रोकने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं ने प्रदेश के सभी सीएमओ को राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाए जाने के संबंध में दिशा-निर्देश भेजे हैं। इस संबंध में सितंबर में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि, पहले से ही आदेश हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पादों को न बेचा जाए। शैक्षणिक संस्थानों की 100 गज की परिधि में तंबाकू उत्पाद की दुकानें नहीं होनी चाहिए। विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में धूम्रपान प्रतिबंधित होना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। लेकिन स्कूल-कॉलेज के सामने खुलेआम तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। दुकानदार भी बच्चों को तंबाकू उत्पाद देने से परहेज नहीं करते।
ग्लोबल यंग टोबैको सर्वे की रिपोर्ट पढ़ी थी। हाईस्कूल तक आते-आते 23 प्रतिशत बच्चों के सिगरेट या तंबाकू उत्पाद के सेवन की बात कही गई है। यह चिंताजनक है। प्राइवेट व पब्लिक स्कूलों में इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्यादातर वो बच्चे इस लत के शिकार होते हैं, जिनके अभिभावक पहले से सिगरेट या तंबाकू उत्पाद का सेवन करते हैं। पाउच में तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए।
- प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल डेवलपमेंट सोसाइटी
सिगरेट या अन्य के नशे की गिरफ्त में आए बच्चों के अभिभावक मेरे पास आते हैं। यह चिंता की बात है। शुरू में अभिभावक भी सच्चाई बताने से बचते हैं। ज्यादातर बच्चे दोस्तों को देखकर पहली बार सिगरेट या अन्य नशे को अजमाते हैं। अभिभावक पढ़ाई में दिलचस्पी न दिखाने, परिवार से दूर रहने व चिड़चिड़ाहट आदि की शिकायत करते हैं। रोकथाम के लिए परिवार, स्कूल, प्रशासन एवं समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे।
- डॉ. अंशु एस सोम, साइकोथेरेपिस्ट, मलखान सिंह जिला अस्पताल
स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के आसपास धूम्रपान, नशा की वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगना चाहिए। यह नियम तो बहुत दिन से है लेकिन कड़ाई से पालन नहीं होता है। आसानी से उपलब्ध होने के कारण भी बच्चे इसकी चपेट में आते हैं। स्कूल प्रबंधन, अभिभावक, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं प्रबुद्ध जनों को मिल बैठकर इस समस्या का समाधान खोजना होगा।
- अनुराग गुप्ता, अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन
हमलोग अपने स्तर से हर तरह की सावधानी बरतते हैं। तंबाकू उत्पाद का सेवन करने वाले छात्रों के साथ ही अभिभावक को बुलाकर काउंसिलिंग करते हैं। डराते हैं ताकि बच्चा गलत आदत न पाले। लत का एक प्रमुख कारण पारिवारिक एवं सामाजिक वातावरण भी होता है। बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए सबसे पहले माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों को ध्यान रखना होगा।
- अंबुज जैन, प्रधानाचार्य, बाबूलाल इंटर कॉलेज
ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (2021) की रिपोर्ट चिंताजनक है। शासन भी चिंतित है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश का इस संबंध में दिशा-निर्देश मिला है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तंबाकू उत्पादों की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे अधिकारी एवं कर्मचारी स्कूल में जाकर बच्चों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हैं। तंबाकू से फेफड़े खराब होते हैं, कैंसर से दर्दनाक मौत तक हो जाती है।
- डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमओ
साढ़े तीन लाख से अधिक है कक्षा छह से 12 में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या
जनपद में करीब 80 प्राइवेट एवं पब्लिक स्कूल है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों की संख्या अनुमानित तौर पर करीब 40 से 50 हजार के आसपास है। बेसिक एवं माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक के छात्रों की संख्या करीब तीन लाख से अधिक है।
डॉ अंशु एस सोम। साइकोथैरेपिस्ट मलखान सिंह जिला अस्पताल- फोटो : CITY OFFICE