अलीगढ़-मथुरा-आगरा सहित पश्चिमी यूपी के 11 जनपदों में बृहस्पतिवार 10 फरवरी को मतदान हो रहा था। उधर, जिले का टॉप-10 पेशेवर शूटर प्रवीन बाजौता व उसके साथी की महज अवैध हथियार रखने में राजस्थान में गिरफ्तारी हो गई। इस तरह एकाएक ये गिरफ्तारी सुनियोजित तरीके से होने का अंदेशा है, जिसमें किसी सियासी मददगार या राजस्थान पुलिस से जुड़े मददगार की मदद के संकेत हैं। इस तथ्य को उजागर करने पर भी पुलिस काम कर रही है। फिलहाल, पुलिस का जोर प्रवीन को यहां तलब कराने और रिमांड पर लेने का है। उसके यहां आते ही इस सुनियोजित गिरफ्तारी के सच से पर्दा उठाने सरीखे सवालों पर भी काम किया जाएगा।
संदीप गुप्ता हत्याकांड में 25 जनवरी को उनके दामाद अंकुश अग्रवाल व दोस्त साहिल की गिरफ्तारी के बाद प्रवीन का नाम उजागर होते ही पुलिस उसे तलाश रही थी। उसके घर व संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश चल रही थीं। फरवरी की शुरुआत में चुनावी व्यस्तता में पुलिस उधर ध्यान नहीं दे पाई। मगर यह तय था कि चुनाव होते ही प्रवीन के खिलाफ गैरजमानती वारंट लेने, उस पर इनाम घोषित कराने आदि की प्र्रक्रिया होगी। इधर, खुद संदीप गुप्ता का परिवार उच्च स्तर पर प्रवीन की गिरफ्तारी के लिए अधिकारियों के लगातार संपर्क में था। मामले में एसटीएफ को शामिल करने के प्रयास कराए जा रहे थे। इस सबके चलते प्रवीन खुद को घिरा हुआ महसूस तो कर रहा था। उसे न्यायालय में सरेंडर का मौका नहीं मिला।
उस समय ऐसे हुई थी फर्जी गिरफ्तारी
एकाएक 10 फरवरी को भरतपुर में इस गिरफ्तारी पर पुलिस हैरान है। जैसे ही यह खबर फैली तो पुलिस को पुराने इनपुट भी मिले। उजागर हुआ कि जब 30 मई 2013 को कचहरी में होशियार सिंह की हत्या हुई तो उसमें प्रवीन के रिश्ते के मामा अविनाश निवासी बसेली और सगे चाचा छेत्रपाल निवासी बाजौता सहित प्रवीन आदि कई लोगों को नामजद किया गया था। जब इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया तो इनके पक्ष से जमानत के समय मुकदमे में नामजदगी गलत करार देकर साक्ष्य पेश किए गए। दोनों ने बताया कि उन्हें 28 मई को भरतपुर की भुसावर थाने में आबकारी अधिनियम में गिरफ्तार किया गया था और 31 मई को वहां के न्यायालय से जमानत मिली। वे हत्या के समय मौके पर कैसे हो सकते हैं। यह साक्ष्य देख पुलिस भी दंग रह गई। न्यायालय के निर्देश पर यहां से पुलिस के विवेचक डीके सचान को भरतपुर भेजा गया। वहां जांच में सच उजागर हुआ। जांच में साफ हुआ कि घटना के बाद दोनों ने यहां से भागकर पहले से हुई साठगांठ के आधार पर वहां गिरफ्तार हुए थे। दोनों की गिरफ्तारी 28 मई की रात में जीडी में ओवरराइटिंग कर की गई थी। इस खुलासे पर वहां के कुछ पुलिसकर्मी निलंबित हुए थे और यहां इन दोनों को हत्या में ही आरोपी बनाकर चार्जशीट दी गई।
हरियाणा से सियासी संपर्क या राजस्थान से मदद का अंदेशा
फिलहाल, पुलिस कुछ भी बताने से बच रही है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रवीन बाजौता चूंकि हथियारों की तस्करी के धंधे में शामिल रहा है। इससे जुड़े दिल्ली आदि में उस पर मुकदमे हैं। इसी क्रम में दिल्ली के अपराधी अंगद से उसकी दोस्ती हुई है। पिछले दिनों उसके कुछ फोटो हरियाणा में सत्ता से जुड़े एक प्रदेश स्तरीय सियासी रसूखदार के साथ देखे गए हैं। वहां से भी मदद का अनुमान है। इसके अलावा पहले मामा व चाचा की हुई फर्जी गिरफ्तारी को लेकर राजस्थान पुलिस से जुड़े कुछ संपर्कों पर भी अंदेशा है। ‘सुनियोजित गिरफ्तारी’ को लेकर इन तमाम पहलुओं पर पुलिस काम कर रही है। सच प्रवीन के सामने आने पर ही उजागर होगा।
जेल जाते समय पहुंची पुलिस, नहीं हो सकी ज्यादा बात
रात में किस समय गिरफ्तारी हुई, ये तो भरतपुर पुलिस का रिकार्ड बता सकता है। मगर सुबह जब खबर अलीगढ़ आई और यहां से टीम को भेजा गया तो प्रवीन व उसके साथी को वहां जेल में दाखिल किया जा रहा था। वहां की पुलिस ने बात कराने से इंकार कर दिया। किसी तरह अधिकारियों से बातचीत के बाद कुछ समय प्रवीन से बातचीत के लिए मिला और फिर उसे जेल दाखिल कर दिया गया।
- इस स्तर के अपराधी की इस तरह अचानक से हुई यह गिरफ्तारी खुद में सवाल खडे़ कर रही है। पहली प्राथमिकता उसे यहां लेकर आने की है। इसके बाद इस पहलू पर भी काम किया जाएगा। जो भी सच सामने आएगा, उस अनुसार अधिकारियों के निर्देश पर आगे कार्रवाई होगी।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय