इन तत्वों ने शरीर में होने वाले नुकसान (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस) को कम किया और कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद की। मानव रक्त कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण में यह भी सामने आया कि जी-एलडीएल खून की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर उनकी ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घटा देता है, जिससे एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन क्रोसिन के उपयोग से इस नुकसान में काफी कमी देखी गई।
इसी तरह चूहों पर किए गए प्रयोग में पाया गया कि क्रोसिन ने न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद की, बल्कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाया और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाया। लिवर, किडनी और पैंक्रियाज को नुकसान से बचाया। इंसुलिन स्तर में सुधार हुआ और ऑक्सीडेटिव तनाव कम हुआ है।
यह शोध न इलाज की नई दिशा दिखाता है। प्राकृतिक तत्वों के जरिये गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।-उमर पीरजादा, पीआरओ, एएमयू
ये भी जानें
- क्रोसिन (केसर से प्राप्त): यह जी-एलडीएल से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है। एलडीएल में होने वाले संरचनात्मक बदलाव (फाइब्रिलर एग्रीगेट्स) को रोकता है। एलडीएल की संरचना को सुरक्षित रखता है और मजबूती से जुड़कर उसे स्थिर बनाता है।
- रुटिन : एजीईएस के निर्माण को लगभग 80 फीसदी तक कम करता है। ऑक्सीडेटिव तनाव को घटाता है। एलडीएल की खराब संरचना को फिर से सामान्य बनाता है। कंप्यूटर आधारित अध्ययन में यह एलडीएल के साथ स्थिर रूप से जुड़ा पाया गया।
- एलोइन (एलोवेरा से): एजीईएस और हानिकारक संरचनाओं के बनने को कम करता है। ऑक्सीडेटिव नुकसान घटाता है। एलडीएल की संरचना को सुधारता है। एलडीएल के साथ मजबूत और स्थिर संबंध बनाता है।