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हुकूमत की जंग ‘हाथी’ पर लड़ी जाती है ‘साइकिल’ पर नहीं : जमीर

Mon, 11 Sep 2017 01:52 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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राजनी‌ति - फोटो : demo pic
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आशीष निगम
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सपा से बागी हुए दो बार के विधायक हाजी जमीरउल्लाह के बसपा में शामिल होने के बाद अलीगढ़ की सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। कुछ दिन पहले ही बसपा के कद्दावर नेता पूर्व कबीना मंत्री ठा. जयवीर सिंह ने जब पूरे कुनबे के साथ भाजपा का दामन थामा था तब एक बारगी लगा था कि बसपा अलीगढ़ में कमजोर हो गई है। लेकिन कुछ ही दिनों में बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस कमजोरी को दूर कर दिया। विधानसभा चुनाव 2017 में दलित-मुसलिम गठजोड़ का फार्मूला अपनाने वाली बसपा ने इस फंडे पर जमीरउल्लाह को ‘हाथी’ पर सवार होने का मौका दिया है। इस पर जमीर कहते हैं कि इतिहास गवाह है कि किसी भी हुकूमत की जंग ‘साइकिल’ पर नहीं ‘हाथी’ पर सवार होकर लड़ी जाती है। पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश-
अमर उजाला : सपा से आप दो बार विधायक रहे हैं। अब बसपा में आ गए हैं। क्या बसपा से मेयर का चुनाव या आगामी लोकसभा का चुनाव लड़वाने का कोई भरोसा दिलाया गया है। क्या बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस संबंध में आपसे बात की? 
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जवाब : देखिए जनाब.। अब भाजपा से हुकूमत की जंग होनी है। जंग साइकिल पर नहीं हाथी पर सवार होकर लड़ी जाती है। अब हाथी ही जंग जीतेगा। बहन मायावती ने मुझसे अलीगढ़ लोकसभा में मुसलिम और दलितों वोटरों का गठजोड़ पूछा था तो मैंने उनको बताया कि चार लाख से अधिक मुसलिम और साढ़े तीन लाख से अधिक दलित वोटर हैं। दोनों मिल जाएं तो जीत बसपा की होगी। 
अमर उजाला : आप कहते रहे कि मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ेंगे फिर बसपा में क्यों गए?

जवाब : मैं हमेशा से साफ सुथरी राजनीति करने वाला व्यक्ति हूं। बसपा में जाने से पहले मैं नेता जी मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से मिला और उनको पूरी बात बताई। उनसे मैंने कहा कि अब मैं आपका साथ छोड़ रहा हूं। अब सपा की राजनीति में कोई मिशन नहीं रह गया। अब ये गरीबों की आवाज उठाने वाली पार्टी नहीं है। बहन मायावती ने पूरे प्रदेश में 100 से ज्यादा मुसलिम भाइयों को चुनाव लड़ने का मौका दिया। वही गरीबों की मसीहा हैं। इसलिए उनके मिशन से प्रभावित होकर मैं बसपा में जा रहा हूं। 

अमर उजाला : आपके साथ और कौन-कौन से नेता बसपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं? 17 सितंबर को आपने शाहजमाल ईदगाह में भव्य समारोह की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें कौन कौन कौन से नेता आएंगे?
जवाब : यकीन मानिए अलीगढ़ के कई बड़े नेता बसपा के संपर्क में हैं, जो बसपा में आने जा रहे हैं। हमारा कुनबा बढ़ेगा। 17 सितंबर को जोन कोआर्डिनेटर सुनील चित्तौड़, अशोक सिद्धार्थ, जोन इंचार्ज सूरज सिंह, रणवीर कश्यप, महेश सिंह, जिलाध्यक्ष अशोक सिंह सहित कई बड़े नेता इसमें शामिल होंगे। सभी से प्रोग्राम की तैयारियों के बारे में बात हो रही है।   
अमर उजाला : केंद्र और प्रदेश में भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार है। अलीगढ़ में विपक्ष की भूमिका बहुत सीमित है। क्या आप इसको मजबूत कर पाएंगे। 
जवाब : इंशाअल्लाह..। आप सब लोग यहीं पर रहेंगे और देखेंगे कि 17 सितंबर के बाद विपक्ष कितनी ताकत के साथ उभरेगा। सत्ता पक्ष की मनमानी और हठधर्मिता अब और नहीं चलेगी। गरीबों, व्यापारियों, किसानों और कामगारों को परेशान नहीं होने देंगे। हमने हमेशा गरीबों के साथ काम किया है और उनके ही साथ काम करेंगे। विपक्ष की ताकत जनता खुद महसूस करेगी। 

फरवरी के बाद सोचूंगा किस पार्टी में जाना है : राजेश
पूर्व भाजपा नेता एवं प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी औरा पर्ल के प्रमुख राजेश भारद्वाज के दूसरी राजनीतिक पार्टी में जाने की भी जबरदस्त चर्चा है। लेकिन उन्होंने अभी ऐसे किसी फैसले को लेने से इंकार किया है। उन्होंने कहा है कि वह अभी किसी राजनीतिक दल में जाने का विचार नहीं रखते। अभी वह अपनी बेटी डा. शिल्पी भारद्वाज और बेटे अमन भारद्वाज के विवाह की तैयारियों पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। शिल्पी की शादी कांग्रेस से सात बार विधायक रहे दिल्ली के मुकेश शर्मा के परिवार में हो रही है तो अमन भी बड़े घराने से जुड़ रहे हैं। बेटी की शादी 20 नवंबर को तो बेटे की शादी फरवरी में होगी। इसके बाद ही फुर्सत मिलने पर कुछ तय करेंगे। कांग्रेस, बसपा या कहीं और जाने की बात तभी होगी। सभी के दरवाजे खुले हैं। तकरीबन चार महीने से वह भाजपा से निलंबित हैं। संघ और भाजपा के प्रमुख नेताओं ने भी उनको बातचीत करने के लिए बुलाया है। लेकिन सभी फैसले फरवरी के बाद होंगे। भाजपा, कांग्रेस, बसपा या कोई और..?
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जमीर ने अपनी ही कौम से गद्दारी की : अशोक 
सपा जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने कहा है कि सपा ने जमीरउल्लाह को नहीं निकाला था। वह खुद ही कोल विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अज्जू इसहाक के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़े और हार गए। इसके बाद उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंच से ऐलान किया कि उन्होंने सपा को सभी सात सीटों पर चुनाव हरवा दिया। जिसका दावा उन्होंने चुनाव से पहले ही कर दिया था। दरअसल, उन्होंने बसपा और भाजपा से मिल कर सपा को हराया था और ये बात किसी से छिपी नहीं है। जिस मुसलिम समुदाय का नेता होने का वह दम भर रहे हैं उन्होंने उसी कौम के प्रत्याशियों को चुनाव हरवा कर गद्दारी की है। 
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