म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर देश में छिड़ी राष्ट्रीय बहस के बीच राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का मानना है कि रोहिंग्या मुसलमानों से सरकार हमदर्दी रखती है, लेकिन वे देश की सुरक्षा के लिए वे खतरा साबित हो सकते हैं। केंद्र सरकार की नई हज नीति से भी आयोग संतुष्ट है। बिना मेहरम के महिलाओं के हज के सफर पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी का कहना है कि ऐसी महिलाएं समूह बनाकर हज पर जा सकती हैं। सरकार की नीतियों से अल्पसंख्यकों को डरने की जरूरत नहीं है।
शनिवार को दि अलीगढ़ मूवमेंट पत्रिका की ओर से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ब्वॉयज पॉलीटेक्निक आडिटोरियम में सर सैयद अहमद खान के 200वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गैयूरुल हसन रिजवी से अमर उजाला ने बातचीत की, पेश हैं उसके मुख्य अंश....
सवाल : रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर आपका नजरिया क्या है?
जवाब : रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सरकार की हमदर्दी है, लेकिन वह कानून व्यवस्था के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। हालांकि, सरकार पहले ही अपना दृष्टिकोण साफ कर चुकी है। फिर भी रोहिंग्या मुसलमानों का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उसके फैसले का इंतजार कीजिए।
सवाल : 45 साल की महिला को अकेले हज पर जाने की इजाजत जायज है?
जवाब : देखिये, अगर किसी महिला का मेहरम नहीं है तो क्या उसे हज पर जाने का हक नहीं है। सरकार की नीयत साफ है। ऐसी महिलाएं समूह बनाकर हज पर जा सकती हैं। यह इस्लाम के खिलाफ नहीं है। हज करना हर साहिबे निसाब पर फर्ज है। नई हज नीति से वह संतुष्ट हैं।
सवाल : भाजपा से जुड़ने में मुसलमान असहज महसूस क्यों करता है ?
जवाब : यह सच है, जिस तरह मुसलमानों को भाजपा से जुड़ना चाहिए, उस तादाद में नहीं जुड़ पा रहे हैं। वह उलझन में हैं और उन्हें उलझाया जा रहा है, जबकि सरकार उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना चाहती है। अल्पसंख्यकों को डरने की जरूरत नहीं है।
सवाल : पटाखे पर पाबंदी को हिंदू-मुस्लिम से जोड़ा जा रहा है?
जवाब : सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को देखते हुए पटाखे पर पाबंदी लगाई है, इसे हिंदू-मुस्लिम से जोड़ना बेकार की बातें हैं।