कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री की संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा के बाद देशभर में खलबली मच गई थी। रेल, बस सेवा बंद कर दी गई थी। फैक्ट्रियों में तालाबंदी हो गई थी। इसका सीधा असर मजदूर वर्ग पर पड़ा था। जेब में फूटी कौड़ी न होने और खाने का संकट गहराने पर लोगों ने अपने गांव-घर का रुख कर लिया था। लोग पैदल, रिक्शे, ढकेल, ठेल के सहारे अपनी मंजिल की ओर जा रहे थे। रेलवे के पार्किंग स्टैंड पर खड़ा रिक्शा लॉकडाउन के दर्द का बयां कर रहा है। इस रिक्शे को चलाकर पांच सदस्यीय परिवार दिल्ली से अलीगढ़ पहुंचा था। 20 माह गुजरने के बाद भी यह रिक्शा अपने मालिक की राह देख रहा है।
24 मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद दिल्ली, एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों से कामगारों का पलायन शुरू हुआ था, जिसको जो साधन मिला, वह उसी से अपनी राह तय कर रहा था। बिहार निवासी एक परिवार 150 किलोमीटर रिक्शा चलाकर अलीगढ़ पहुंचा था। परिवार को इतनी दूरी तय करने में डेढ़ दिन लग गए थे। 15 जून 2020 को इस परिवार ने रिक्शे को रेलवे स्टेशन स्थित पार्किंग स्टैंड में खड़ा कर दिया और बाकी की यात्रा ट्रेन से करने का फैसला लिया था। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि परिवार की हालत काफी खराब थी। ये लोग दिल्ली में मजदूरी कर भरण-पोषण करते थे। स्थानीय लोगों ने उनको खाना खिलाया व पैसे भी दिए। पार्किंग स्टैंड संचालक ने मानवता के नाते उनसे कोई किराया नहीं लिया। करीब 20 महीने से खड़ा ये रिक्शा अपने मालिक की राह ताक रहा है।
जून 2020 में एक परिवार रिक्शा चलाकर दिल्ली से अलीगढ़ आया था। पार्किंग थ्री व्हीलर की नहीं है, लेकिन मानवता के आधार उसका रिक्शा खड़ा करा लिया था। किराया भी नहीं लिया था।
- मनोज तिवारी, संचालक, रेलवे स्टैंड
बीस महीने पहले लॉकडाउन में एक परिवार रिक्शे से आया था। बिहार के रहने वाले थे। परिवार में दो भाई, पत्नी और दो बच्चे थे। आसपास के लोगों ने काफी मदद की थी। खाना, पैसा भी दिया था।
दीपक सैनी, प्रत्यक्षदर्शी
दीपक सैनी, प्रत्यक्षदर्शी।- फोटो : CITY OFFICE
रेलवे की पार्किंग में खड़ा रिक्शा।- फोटो : CITY OFFICE