मुख्य अभियंता सुबोध कुमार शर्मा
-मामला संज्ञान में होने बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसकी वजह के प्रथम दृष्टया जांच में दोषी पाया गया।
अधीक्षण अभियंता अजय कुमार
-निरीक्षण रिपोर्ट ईआरपी पोर्टल पर अपलोड किए बिना डीआई जारी होने का संज्ञान होने, फर्म से संलिप्तता दिखाने और गलत डीआई निरस्त नहीं करने का दोषी पाया गया।
अधीक्षण अभियंता राघवेंद्र
-बिना उचित दस्तावेज प्राप्त किए डीआई ईआरपी पोर्टल पर अपलोड करने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने पर।
अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार मौर्य
-बिना निरीक्षण रिपोर्ट ईआरपी पोर्टल पर अपलोड किए डीआई जारी करने और बिना दस्तावेजों के सामग्री प्राप्त करने के लिए अधिनस्थों पर दबाव बनाना
शत्रुघन चौहान उप खंडाधिकारी खंड- 2
कौड़ियागंज साइट पर फर्म की सामग्री लगाने से पहले भौतिक जांच नहीं करने, कम वजन के खंभे और कम गुणवत्ता की एबी केबल लगाने का दोषी पाया गया।
सचिन कुमार उप खंडधिकारी-6
-विजयगढ़ में लगाई गई सामग्री की भौतिक जांच नहीं करने कम वजन के खंभे बिना ग्राउटिंग लगाए जाने के लिए दोषी पाया गया।
मनोज कुमार अवर अभियंता कासिमपुर तेहरा
-तत्कालीन अवर अभियंता कौड़ियागंज साइट पर लगाने पहले खंभे और केबल की गुणवत्ता की जांच नहीं करने पर।
खराब ट्रांसफार्मर लगाने से हो गई थी ग्रामीण की मौत
बिजली विभाग में यही मामला नहीं बल्कि और भी घालमेल चलता रहा है। गत 26 अगस्त को अतरौली के गांव नौरथा में ट्रांसफार्मर फटने से एक ग्रामीण की मौत हो गई थी, उसकी पत्नी, बेटा और मवेशी बुरी तरह से झुलस गए थे। इसकी जांच में सामने आया था कि क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को बिना जांच के ही गांव में लगा दिया गया था।