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अलीगढ़ : थीसिस जमा न होने पर शोधार्थी ने की आत्महत्या की कोशिश

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के इंटरडिस्पलनरी ब्रेन रिसर्च सेंटर यूनिट की शोधार्थी नबीला खानम ने थीसिस जमा न होने पर नींद की गोली खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। शोधार्थी ने सुपरवाइजर पर थीसिस जमा करने में अड़चन पैदा करने का आरोप लगाया है। इस मामले में कुलपति ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है।
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मूल रूप से संभल की रहने वालीं शोधार्थी नबीला अपने पति के साथ धौर्रामाफी में रह रही हैं। उन्होंने रविवार रात नींद की कई गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। गंभीर हालत में उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर है। पिछले दिनों थीसिस जमा करने में देरी होने को लेकर नबीला के पति की सुपरवाइजर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मेहंदी हयात शाही से नोकझोंक भी हुई थी। शनिवार को को - सुपरवाइजर बायो केमिस्ट्री जेएन मेडिकल कॉलेज प्रो. मुईन उद्दीन ने नबीला को फटकार भी लगाई थी। इसके बाद नबीला ने नींद की गोलियां खा ली।
उन्होंने वर्ष 2018 में शोधार्थी के रूप में पंजीकरण कराया था। इस मामले में डॉ. मेहंदी हयात शाही ने बताया कि वह कुछ नहीं कहना चाहते हैं, क्योंकि कुलपति ने जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बना दी है। यह कमेटी मामले की जांच करेगी। प्रॉक्टर वसीम अली ने बताया छात्राओं के परिजनों की ओर से दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि छात्रा का शोध कार्य पूरा है। जब वह विभाग में अपनी शोध कार्य जमा करने के लिए जाती है, तो उसे अगली तारीख बताकर शोध कार्य जमा न करने के लिए टरका दिया जाता, यह सिलसिला पिछले दो महीने से जारी है। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर द्वारा बनाई गई दो सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग में स्टेजिक ऑफ ऑपरेशन रिसर्च विभाग के प्रोफेसर काजी मजहर अली व गणित विभाग की प्रोफेसर सुबूही खान को नामित किया है। इस कमेटी से सारे तथ्यों का परीक्षण करके तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है।
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