आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा देवी महिलाओं और बच्चों को शासन से मिलने वाला खाद्यान्न वितरित नहीं किया है। अपने पुत्र और पति के सहयोग से पात्र लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर धोखाधड़ी की गई और सरकारी राशन सामग्री को हड़प लिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने गांव आलमपुर कायस्थान की आंगनबाड़ी कायर्कर्ता और सीडीपीओ के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की है। गांव आलमपुर कायस्थान निवासी बाबू सिंह मुकदमे के वादी बने हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा देवी महिलाओं और बच्चों को शासन से मिलने वाला खाद्यान्न वितरित नहीं किया है। अपने पुत्र और पति के सहयोग से पात्र लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर धोखाधड़ी की गई और सरकारी राशन सामग्री को हड़प लिया।
उनका आरोप है कि शिकायत करने पर सीडीपीओ आशा त्रिपाठी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिलीभगत कर जांच रिपोर्ट में खाद्यान्न का सही वितरण दिखाया। उन्होंने उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीता वार्ष्णेय पर भी इस मिलीभगत में शामिल होने का आरोप मढ़ा।
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18 सितंबर 2024 को अपर जिलाधिकारी की शिकायत पर डीपीओ ने जांच की, लेकिन उस जांच में भी अनियमितता को छिपाया गया। वादी के वकील चंद्रशेखर राजपूत ने बताया कि 22 जनवरी को पंजीकृत डाक से अतरौली कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। प्रकरण न्यायालय में पहुंचा। न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई है।