तहसील अतरौली के निसारपुर के रेशमपाल चार भाई हैं। जिनमें से दो भाईयों ने अपने-अपने हिस्से की जमीन बेच दी है। रेशमपाल को बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना था। इसके लिए खेत की खतौनी मांगी गई। रेशमपाल तहसील में खतौनी लेने पहुंचे तो देखा कि दो भाईयों द्वारा बेची गई जमीन नये खरीददारों के नाम चढ़ चुकी है, लेकिन उनके हिस्से की जमीन उनके नाम ही थी। यह देखकर वे चौंक गए।
पता चला कि यह सब राजस्व परिषद की नई पहल के बाद जारी होने वाली रियल टाइम खतौनी के चलते हुआ है। अलीगढ़ में इसकी शुरूआत हो गई है। अतरौली तहसील में निसारपुर, रायपुर औई, मोहसिनाबाद, फतेहपुर, कनकपुर नाथपुर, किरतौली, फतहपुर गंग, मुरादपुर, नगावली शकूरगंज गांव की जमीनों में रियल टाइम खतौनी तैयार की गई है। बाकी तहसीलों में भी इसे जल्द लागू कर दिया जाएगा।
अक्सर सामने आते हैं विवाद के मामले
एडीएम वित्त एवं राजस्व मीनू राणा ने बताया कि अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े कई विवाद सामने आते हैं। ऐसे मामले भी आते हैं, जिनमें दबंगों द्वारा छोटे किसानों की जमीनों को हड़प लिया जाता है। इन घटनाओं को रोकने के लिए राजस्व परिषद ने नई पहल की है, जिसके तहत अब जमीनों का मालिकाना हक रियल टाइम में अपडेट किया जाएगा। खरीद फरोख्त होने पर जमीन के मालिकाना हक को तत्काल अपडेट किया जाएगा।
अब इसको हर छह सालों में अपडेट करने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए एक खास सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। जिसकी मदद से खतौनी को तुरंत अपडेट किया जा सकेगा। राजस्व परिषद ने राजस्व अभिलेखों में एंट्री की व्यवस्था को तत्काल यानी रियल टाइम पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। खतौनी में अब जमीन के खरीदारों के नाम और भूमि में उनके अंश को इंद्राज तत्काल दर्ज किए जाने की व्यवस्था कर दी गई है। हर हाल में इसे 30 जून तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
राजस्व विभाग ने खतौनी के 13 कालम के ब्योरे को 30 जून तक 19 कॉलम में दर्ज करने के दिशा- निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान समय में खतौनी 13 कॉलम में संचालित हो रही है। इसमें खरीदार एवं विक्रेता का नाम दर्ज रहता है। नये खरीदार का नाम कॉलम 13 में दर्ज होता है। जमीन बेचने के बाद भी संबंधित किसान का नाम मूल खातेदार की श्रेणी में रहता था, अब ऐसा नहीं होगा। जमीन बेचने के बाद सीधे खरीदार का नाम नई खतौनी में दर्ज हो सकेगा। खतौनी एक प्रकार का भूमि अभिलेख होता है। खतौनी में जमीन की पूरी जानकारी होती हैं। व्यक्ति की मृत्यु होने पर या जमीन को बेचने पर इसको उसके वारिस या खरीदार को स्थानांतरण किया जाता है।