पूरे प्रदेश में अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई के बाद भैंस मीट कारोबारी हड़ताल पर हैं। बुधवार को मीट कारोबारियों ने नगर निगम का स्लाटर हाउस चालू करवाने के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। सपा के पूर्व शहर विधायक जफर आलम और पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक भी उनके साथ गए। इन सब घटनाक्रम के बीच एक बहस और छिड़ी है कि नगर निगम अधिनियम में अवैध पशु कटान और बिक्री की रोकथाम के लिए कोई प्रावधान ही नहीं है। सवाल ये भी है कि अगर ये प्रावधान नहीं होंगे तो इस पर प्रभावी रोकथाम कैसे होगी..?
गौर करें तो शहर में भैंस मीट के 136, बकरे के 37 और मुर्गा बेचने के नगर निगम से केवल 37 रजिस्ट्रेशन हैं। ये रजिस्ट्रेशन केवल बेचने के लिए हैं काटने के लिए नहीं। नगर निगम का मकदूम नगर स्थित स्लाटर हाउस वर्ष 2014 से बंद है। ऐसे में पूरे शहर में भैंस, बकरा, मुर्गा सभी का कटान पूर्णयत: अवैध है। मेयर शकुंतला भारती भी इसको स्वीकार करती हैं। इससे भी खास बात ये है कि नगर निगम अधिनियम में अवैध रूप से पशु कटाने या पशु मांस अवैध रूप से बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का कोई प्रावधान ही नहीं है। मेयर कहती हैं कि नगर निगम के अधिनियम में संशोधन की सख्त जरूरत है। वह अपने स्तर से इसका सुझाव पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नगर विकास मंत्री भेज रही हैं, ताकि विधानसभा में इस पर बात आगे बढ़ सके। नये अधिनियम बने और उन पर अमल किया जा सके।
नगर निगम अधिनियम
1 नगर निगम अधिनियम 550 के तहत किसी भी अन्य धारा के उल्लंघन या गंदगी, बदबू फैलाने पर कार्रवाई होती है।
2 नगर निगम अधिनियम 550 (ए) में पहली बार उल्लंघन या बहुत गंदगी बदबू फैलाने पर अदालत से चेतावनी मिलती है।
3 नगर निगम अधिनियम 550 (बी) में गंदगी और बदबू फैलाने पर दोबारा पकड़े गए लोगों से 20 रुपये प्रतिदिन की दर से अर्थदंड।
4 नगर निगम अधिनियम 550 (सी) में गंदगी के कारण समाप्त होने तक लाइसेंस नहीं बनने तक मुकदमा खत्म नहीं होगा।
5 नगर निगम अधिनियम 437 (सी) में गंदगी के कारण और उस पर हुई कार्रवाई पर सुनवाई।
6 नगर निगम अधिनियम 467 (सी) में गंदगी के कारण समाप्त होने तक लाइसेंस नहीं बनने तक मुकदमा खत्म नहीं होगा।
नगर निगम का मकदूम नगर स्थित एकमात्र स्लाटर हाउस वर्ष 2014 से बंद है। इसमें कोई काम नहीं हो रहा है क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इसके संचालन की अनुमति नहीं हैं। अनुमति इसलिए नहीं मिली क्योंकि यहां पर मानक के अनुसार कटान के बाद निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए आधुनिक ईटीपी प्लांट नहीं था। अब प्लांट का स्ट्रक्चर बन गया है, मशीनें लगनी बाकी हैं। इसको संचालित करने वाले ठेकेदार को रेंडरिंग प्लांट लगाना होगा, जिसमें पशुओं के अव्यव भी नष्ट हो जाएंगे। भैंस काटने का लाइसेंस प्रदेश स्तर से मिलता है। जिसके लिए जिला से लेकर प्रदेश तक अलग-अलग स्तर पर अनुमति लेनी होती है। मुर्गा सीधे बेचा जाता है इसलिए इसमें काटने का लाइसेंस नहीं मिलता है।
-संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त
नगर निगम अधिनियम में बदबू और गंदगी फैलाने को लेकर कोई सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं हैं। अगर वाकई में सख्त कार्रवाई का अधिकार नगर निगम को दिया जाए तो प्रभावी एक्शन हो सकता है। वर्ष 2015-16 में गंदगी और बदबू फैलाने को लेकर लगभग 37 मामले दर्ज हुए जिनकी सीजेएम अदालत में सुनवाई जारी है।
-प्रताप कुलश्रेष्ठ, एडवोकेट नगर निगम