महानगर में प्राइवेट बसों का संचालन बंद होने के बाद लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटे रूटों पर चलने वाले यात्रियों को इससे अधिक परेशानी हो रही है, चूंकि रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह सबसे उचित एवं सस्ता माध्यम था। इसके बंद होने से यही लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
परिवहन निगम ने प्राइवेट बस आपरेटरों की हड़ताल को बेअसर करने के लिए 65 बसों का अतिरिक्त संचालन किया। मडराक थाना क्षेत्र में हुई दुर्घटना के बाद डीएम ने प्राइवेट बसों के शहर के अंदर से संचालन पर पूर्णत: रोक लगा दी। गुरुवार की रात को पुलिस एवं आरटीओ ने महानगर के कई प्राइवेट बस अड्डे से करीब 18 बसों को उठाकर उनका चालान किया। इससे प्राइवेट बस आपरेटरों में अफरा-तफरी मच गई।
बस आपरेटरों ने शुक्रवार को बसों को अड्डो से बाहर नहीं निकाला। इससे निपटने के लिए परिवहन निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में रोडवेज बसों की ईटीएम मशीन में अतिरिक्त रूट फीड कराए। ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन बसों को किसी भी मार्ग पर भेजा जा सके। शनिवार को पांच डिपो से 65 बसों को प्राइवेट बस वाले मार्गो पर दौड़ाया गया।
इसके चलते यात्रियों को कम परेशानी हुई है, लेकिन रोडवेज बसो में किराया अधिक लगा। गांधी पार्क बस स्टैंड प्रभारी मुनेश पाल सिंह ने बताया कि इगलास के लिए मथुरा जाने वाली बस, आगरा जाने वाली बस में सासनी और इस मार्ग पर पड़ने वाले छोटे स्टाप की सवारियों को बिठाया गया। सभी परिचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वह मार्ग की किसी भी सवारी को बिठाने से मना नहीं करेंगे।
प्राइवेट बसें बंद होने से कम हुआ सड़कों पर लोड
प्राइवेट बसों का संचालन बंद होने से शहर में लगने वाले जाम से कुछ हद तक निजात भी लोगों ने महसूस की। छोटे एवं संकरे मार्गों पर दौड़ने वाली बसों के न चलने से जाम नहीं लगा। हालांकि कुछ लोगों का इसके पीछे तर्क यह भी था कि शनिवार को छुट्टी होने के कारण भी सड़कों पर वाहनों की संख्या कम रही। इस कारण भी जाम के हालात उत्पन्न नहीं हुए।
प्राइवेट बस अड्डों पर पसरा रहा सन्नाटा
डीएम के आदेश के बाद प्राइवेट बसों का संचालन एकदम रुका हुआ है। इसके कारण जो प्राइवेट बस अड्डे पूरे दिन गुलजार रहते थे वह सुनसान रहे। कुछ स्थानों पर बसों पर चलने वाले चालक परिचालक अवश्य घूमते दिखाई दिए, लेकिन अन्य स्थानों पर केवल बसें खड़ी हुई थी। जिन अड्डों पर लोग थे वह भी बसों की देखभाल के लिए तैनात किए गए थे। प्रशासन के कड़े रुख के कारण प्राइवेट बस आपरेटरों की बस संचालन की हिम्मत नहीं हुई। वह प्रशासन के आदेश का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं।