विधि छात्रों के लिए दोबारा से ओएमआर शीट पर परीक्षा कराने के वाले परीक्षा समिति के निर्णय को डीएस कॉलेज में आयोजित छात्र महापंचायत में नकार दिया गया। विधि छात्रों और छात्र नेताओं ने इसे हिटलरशाही फरमान बताया और नारेबाजी करते हुए प्राचार्य डॉ. हेमप्रकाश के कार्यालय पहुंचे। यहां प्राचार्य को ज्ञापन दिया कि पासिंग नंबर दिए जाएं। अगर नहीं दे सको तो लिखित में परीक्षा कराई जाए। साथ ही स्वतंत्र विषय चुनने की अनुमति दी जाए।
अगर ऐसा नहीं होता है तो हम कार्यालय में ही बैठे रहेंगे। यह कहकर जैसे ही छात्र बैठे, वैसे ही प्राचार्य कार्यालय को छोड़कर बाहर चले गए। इसके बाद समझाने आए चीफ प्रॉक्टर मुकेश भारद्वाज को दो घंटे तक बैठाए रखा। शाम को प्राचार्य डॉ. हेमप्रकाश ने आश्वासन दिया कि आपकी मांग को अकादमी की बैठक में रखूंगा। कुछ समय दे दो, तो छात्रों ने 18 दिन बाद 18 घंटे के लिए धरना स्थगित कर दिया है।
रविवार को कुलपति और परीक्षा समिति की घंटो चली बैठक में आए निर्णय से छात्र पूरी तरह असंतुष्ट हैं। जिसको लेकर सोमवार को विधि छात्र व छात्र नेता अमित गोस्वामी के बुलावे पर डीएस कॉलेज में महापंचायत लगी। यहां सभी छात्रों ने एक सुर में रविवार को कुलपति द्वारा दिए निर्णय को नकार दिया और सुबह 11 बजे के लगभग प्राचार्य कक्ष में पहुंचकर प्राचार्य से वार्ता की। प्राचार्य ने कुलपति से पुन: इस विषय में बात करने की बात की, लेकिन छात्रों का कहना था कि हमें पूर्ण आश्वासन चाहिए कि आप छात्रों के हित में प्रमुखता से यह लड़ाई लड़ेंगे।
इसके बाद प्राचार्य अपने कक्ष को छोड़कर बाहर चले गए। चीफ प्रॉक्टर डॉ. मुकेश भारद्वाज आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंचे और छात्रों को कार्यालय खाली करने के लिए समझाने लगे। इस दौरान नोकझोंक भी हुई। यहां छात्र नेता अमित गोस्वामी ने कह दिया कि अगर भविष्य बचाने के लिए कोई छात्र प्राण त्याग दे तो इसके जिम्मेदार आप होंगे तो प्रॉक्टर नि:शब्द हो गए। यहां से चीफ प्रॉक्टर को जाने से इंकार करते हुए कहा कि जब तक छात्र बैठेंगे। तब तक आप भी यहीं बैठेंगे। दो घंटे तक छात्रों ने उन्हें पकड़े रखा।
सूचना पर पुलिस भी पहुंची। प्राचार्य कक्ष में चल रहे धरने को सभी छात्र संबोधित करने लगे। छात्र नेता सौरभ चौधरी और अर्जुन सिंह भोलू ने भी छात्रों के साथ खड़े रहने का एलान किया। करीब पांच घंटे बाद चीफ प्रॉक्टर सहित पूरा प्रॉक्टोरियल बोर्ड पुलिस के साथ प्राचार्य कक्ष में पहुंचे और आगरा यूनिवर्सिटी में मौजूद प्राचार्य से छात्र नेता अमित गोस्वामी की वार्ता कराई गई। प्राचार्य ने शाम तक कोई निर्णय आने की बात कहकर प्रदर्शन स्थगित करने के लिए कहा तो छात्रों ने प्रदर्शन स्थगित कर दिया और प्राचार्य कक्ष को खाली कर दिया।
धरना प्रदर्शन में यह बोले छात्र
नेतृत्व कर रहे छात्र नेता अमित गोस्वामी ने कहा है कि पुन: ओएमआर सीट पर परीक्षा कराए जाने का फरमान कुलपति ने सुनाकर छात्रों के घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है। कुलपति समझ लें हम गांधीजी को ही नहीं, जरूरत पड़ने पर हम भगत सिंह को भी मानने से पीछे नहीं हटते हैं। छात्र नेता अश्वनी सिंह और छात्र नेता कपिल चौधरी ने अपने भविष्य को बचाने के लिए छात्र किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हर हाल में परिणाम में संशोधन कराकर ही दम लेंगे। छात्र नेता केशव ठाकुर और छात्र नेता हर्षद हिंदू ने कहा है कि कुलपति अभी भी अपनी तानाशाही पर उतारू हैं।
कोई निर्णय यदि छात्र हित में नहीं आया तो छात्र बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। छात्र नेता मोहित चौधरी ने कहा कि हर हाल में वीसी को छात्र हित में मांगें माननी ही होंगी। अन्यथा गंभीर परिणाम होंगे। प्रदर्शन करने वाले छात्रों में आदित्य पंडित, अश्वनी प्रताप, मोहित चौधरी, सौरभ राना, धर्मेंद्र बजरंगी, जितेंद्र बघेल, अंकित ठाकुर, गौरव, प्रियांशु, तनुज, आयुष, हिंदू, विशाल, टीपी सिंह, अवनीश सारस्वत आदि मौजूद रहे।
प्यार-दुलार के साथ प्रॉक्टर ने डांटा तो गुरुजी कहकर छात्रों ने चरणों में रख दिया माथा
अलीगढ़। डीएस कॉलेज के प्राचार्य कक्ष में पांच घंट तक चले हंगामे के बीच जब चीफ प्रॉक्टर डॉ. मुकेश भारद्वाज पहुंचे तो उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद नीति का प्रयोग करते हुए छात्रों को हर हाल में प्राचार्य कक्ष से बाहर करने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्रों पर प्यार दुलार भी उड़ेला। साथ ही एक भी बात नहीं मानने पर डांट भी लगाई। इतने में सभी छात्रों ने हाथ जोड़कर और गुरुजी कहते हुए पैर छूने आए। अपना माथा झुकाते हुए बोले कि गुरुदेव जीवन का सवाल है। तिल-तिल कर भविष्य खराब होने से अच्छा है कि अपने प्राण ही त्याग दें।
आप कुछ भी कहें, हम कक्ष को नहीं छोड़ेंगे। इस पर चीफ प्रॉक्टर ने बच्चों को पैर छूने के लिए मना किया और आपस में वार्ता कर स्थगित करने का निवेदन किया। यहां छात्रों की बातों में जब चीफ प्रॉक्टर खुद को फंसता हुआ महसूस करने लगे तो वह दो घंटे बाद बाहर हो लिए। हालांकि बातचीत का दौर बार-बार होता रहा।