जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान में सपा-रालोद एक होते जा रहे हैं। दोनों दलों ने बुधवार देर रात 11 दूनी 22 का नया फंडा निकाला। इन दलों का दावा है कि उनके साथ 22 का समर्थन है, जिसमें पार्टी के समर्थन से और बागी होकर जीते, दोनों तरह के सदस्य शामिल हैं। अब उनको बहुमत के लिए केवल दो निर्दलीयों का साथ चाहिए। सपा और रालोद की इस नई तिकड़म से भाजपा में खलबली मच गई है, हालांकि भाजपा नेता इस फंडे को ख्याली पुलाव बता रहे हैं।
दरअसल, किसान आंदोलन के बाद से सपा और रालोद की जमीन मजबूत हुई है। दोनों पार्टियों को जिला पंचायत के चुनाव में लाभ भी मिला है। इन पार्टियों से समर्थन नहीं मिलने पर बागी होकर चुनाव जीतने वाले सदस्य अब अपनी पार्टियों में वापस लौट रहे हैं। जिससे इन दोनों दलों की स्थिति मजबूत होती जा रही है।
सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा कि उनके कुल जिपं सदस्यों की संख्या 11 हो चुकी है, जिसमें बागी विजयी सदस्य भी शामिल हैं। रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने भी 11 का आंकड़ा पेश किया है। दोनों नेताओं का कहना है कि कुछ प्रत्याशी निर्दलीय होकर मैदान में थे, लेकिन अब पार्टी के साथ है।
सपा और रालोद के नेता बहुमत जुटाने को लेकर बृहस्पतिवार को बैठक करेंगे। दोनों नेताओं ने आलाकमान के निर्देश पर आगे बढ़ने की बात भी कही है। अब फैसला आलाकमान को करना है, हालांकि ये गठजोड़ तय माना जा रहा है। इधर, बसपा के जिप संदस्यों की कुल संख्या बुधवार को सात पर पहुंच गई है। बसपा नेता तिलकराज यादव ने कहा कि पार्टी आगे की परिस्थितियों को देखते हुए फैसला करेगी।
गौर हो कि अभी तक भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जिसके विजयी सदस्यों और जीते हुए बागी सदस्यों की संख्या में फेरबदल नहीं हुआ है। पार्टी नतीजे आने के बाद से अपने विजयी सदस्यों की संख्या 9 और बागी होकर जीते सदस्यों की संख्या छह बता रही है। जिला पंचायत के सदन में बहुमत का गणित देखें तो कुल 47 सदस्यों के सदन में 24 जिपं सदस्यों का समर्थन हासिल कर अध्यक्ष पद मिलेगा।
अब भाजपा, सपा-रालोद या बसपा के बीच में से कौन अध्यक्ष पद हासिल करेेगा..? ये आने वाले दिनों में सामने होगा। इधर, निर्दलीय खेमे से पूर्व जिपं अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह का खेमा हर हालात पर नजर बनाए हुए है और बदलती हुई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी तैयारी कर रहा है।