अलीगंज के लॉजिस्टिक व सीमेंट कारोबारी संदीप गुप्ता हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता एक-एक लाख के इनामी अंकुश अग्रवाल व साहिल यादव गिरफ्तार कर लिए गए। दोनों न्यायालय में सरेंडर की तैयारी में अलीगढ़ आए थे। तभी पुलिस ने इन्हें दबोच लिया। दोनों ने स्वीकार किया है कि यह हत्या टप्पल के गांव बाजौता के पेशेवर अपराधी जिले की टॉप-10 सूची में शामिल प्रवीण बाजौता से बीस लाख रुपये की सुपारी देकर कराई थी और बतौर एडवांस 11 लाख रुपये भी प्रवीण को दिए गए थे। पुलिस ने दोनों को मंगलवार को जेल भेज दिया। अब प्रवीण व उसके दो अन्य साथियों की तलाश शुरू कर दी है।
27 दिसंबर की देर शाम संदीप गुप्ता की सिविल लाइंस क्षेत्र में रामघाट रोड स्थित गांधी आई हॉस्पिटल तिराहा पर उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वे अपनी फारच्युनर से अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के अधिकारी को छोड़ने ग्रीन पार्क जा रहे थे। तिराहे पर उन्होंने अपनी गाड़ी पान मसाला लेने के लिए रुकवाई, तभी साजिशकर्ताओं के इशारे पर भाड़े के शूटरों ने गोलियां बरसाकर संदीप को मौत के घाट उतार दिया था। इस हत्या के खुलासे में एसएसपी ने एसपी सिटी के निर्देशन में पांच टीमों को लगाया था, जिन्होंने जांच में खुलासा किया कि संदीप गुप्ता के रिश्ते के दामाद साईं विहार, सारसौल के अंकुश अग्रवाल ने यह हत्या कराई है। वारदात में अंकुश के ट्रांसपोर्टर पिता राजीव अग्रवाल के अलावा उसके दोस्त बसंत विहार धनीपुर के साहिल यादव, रामघाट रोड के गैराज संचालक दुष्यंत चौधरी, रामघाट रोड के ही प्रॉपर्टी डीलर पुत्र उत्कर्ष चौधरी भी उसके सहयोगी रहे हैं।
हत्या अंकुश व उसकी पत्नी दीप्ति में हुए विवाद में संदीप द्वारा दबाव बनाकर समझौता कराने और समझौते के दौरान बेइज्जती करने के बदले कराई गई। अब तक पुलिस ने घटना में शामिल राजीव अग्रवाल, दुष्यंत चौधरी, उत्कर्ष चौधरी, एक अन्य मनीष व रैकी करने वाले तीन नाबालिगों सहित आठ लोग जेल भेज दिए थे, जबकि अंकुश व साहिल फरार थे। इन दोनों पर एडीजी स्तर से 22 जनवरी को एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था और दोनों के खिलाफ न्यायालय से गैरजमानती वारंट के बाद कुर्की नोटिस जारी हो चुका था।
सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय के अनुसार, इन दोनों के न्यायालय में सरेंडर के लिए अलीगढ़ आने का इनपुट मिला। इसी इनपुट पर दोनों को सोमवार मध्य रात्रि क्वार्सी क्षेत्र के रमेश विहार के पास रॉयल कावेरी चौराहे से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के समय पैदल अपने अधिवक्ता के घर जा रहे थे। घटना के बाद फरारी में प्रयोग की गई स्कार्पियो गाड़ी इन्होंने कहीं और खड़ी कर दी थी, जिसे बरामद कराया गया। दोपहर तक चली पूछताछ में दोनों ने संदीप की हत्या कराना स्वीकारा और बताया कि उसकी मुलाकात अपने दोस्त दुष्यंत के जरिये उत्कर्ष व साहिल से हुई थी। उसने साहिल से संदीप से बदला लेने और मौत के घाट उतारने की बात एक दिन शराब पीते समय साझा की थी। इस पर साहिल ने उसकी मुलाकात टप्पल के बाजौता निवासी पेशेवर शूटर प्रवीण चौधरी से कराई। उसने 20 लाख में हत्या करना तय किया, जिसके लिए बतौर एडवांस 10 लाख एक बार में व एक लाख दूसरी बार में उसे दिए गए। घटना के समय संदीप की गाड़ी की रेकी करने और शूटरों को गाइड करने में खुद अंकुश, उत्कर्ष व साहिल साथ थे। बाइक पर तीन नाबालिग, जो मनीष की मदद से साहिल ने बुलाए थे, वे थे, जबकि दुष्यंत गाड़ियों के मैनेजमेंट के लिए अपने गैराज पर मौजूद था। साथ में अंकुश ने घटना से पहले व बाद में पिता को पूरी जानकारी दी थी। इस तरह घटना में इतने लोग शामिल थे, जबकि हत्या के लिए प्रवीण नीले रंग की बलेनो में अपने साथ दो अन्य बदमाश लेकर आया था। उनके नाम वे दोनों नहीं जानते। पूछताछ के बाद दोपहर में दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
- संदीप गुप्ता हत्याकांड में मुख्य साजिशकर्ता व एक-एक लाख के इनामी अंकुश व साहिल गिरफ्तार कर लिए गए हैं। उन्होंने बाजौता टप्पल के प्रवीण को सुपारी देकर हत्या कराना स्वीकारा है। अब प्रवीण को रडार पर लिया गया है। क्रास जांच कराई जा रही है। प्रवीण व उसके दो अन्य साथियों की तलाश में टीमों को लगाया गया है। जल्द उन्हें भी पकड़ा जाएगा।
- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
व्यापार में झटका, दबाव और बेइज्जती हत्या की वजह
अंकुश ने स्वीकार किया कि संदीप गुप्ता व उसके पिता ट्रांसपोर्ट का काम करते थे। दोनों में अच्छी दोस्ती थी। संदीप गुप्ता ने सीमेंट सप्लाई में उसके पिता की 12 गाड़ियां (ट्रक) अपने लॉजिस्टिक कारोबार में लगा रखी थीं। इसी दोस्ती में 17 फरवरी 2016 को संदीप के अलीगंज के दोस्त सुधीर की बेटी दीप्ति से अंकुश की शादी संदीप ने कराई।
गैर महिला से संबंधों के शक में दीप्ति-अंकुश में विवाद
सीओ तृतीय के अनुसार, शादी के कुछ दिन बाद से ही अंकुश के किसी अन्य महिला से संबंध के शक पर दीप्ति से विवाद शुरू हो गया। दोनों में कई बार झगड़ा भी हुआ, जिसमे हर बार संदीप ने फैसला कराया। मगर विवाद इतना बढ़ गया कि अंकुश के छोटे भाई के सगाई के दिन दोनों में काफी तनातनी हो गई। इस बार भी संदीप ने समझौता करा दिया। इसके चलते उसका अपने पिता से भी मनमुटाव शुरू हो गया। मगर संदीप दबाव बनाने लगे थे कि वह दीप्ति को लेकर अलीगंज आकर रहे। इसी दबाव के बीच गुस्से में अंकुश ने अपना घर छोड़कर दोस्त दुष्यंत के घर रहना शुरू कर दिया।
दहेज उत्पीड़न-दुष्कर्म में बहन-बहनोई क्यों बनाए आरोपी
सीओ तृतीय के अनुसार, पूछताछ में अंकुश ने बताया कि 16 सितंबर 2021 को संदीप दीप्ति व उसकी बेटी को लेकर अलीगंज चले गए। 21 सितंबर को अलीगंज थाने में दहेज उत्पीड़न और दुष्कर्म का मुकदमा लिखवा दिया। जिसमें अंकुश के बहन-बहनोई भी आरोपी बनाए। इसको लेकर अंकुश के परिवार में बेहद तनाव था। बहन-बहनोई भी हमसे नाराज रहने लगे थे। इसी क्रम में अंकुश के पिता ने संदीप गुप्ता से 90 लाख रुपये में पिंका के घर समझौता किया। जिसमें बतौर एडवांस 45 लाख रुपये दिए गए। शेष रकम देनी थी। समझौते में बेइज्जती के चलते अंकुश व संदीप के बीच मनमुटाव इतने हो गए थे कि संदीप ने व्यापार से उनके ट्रक भी हटवा दिए। आर्थिक तंगी भी शुरू होने लगी। ऊपर से संदीप शेष 45 लाख रुपये देने के लिए दबाव बना रहे थे।
बेइज्जती और बेटी की याद कर रोते समय बना हत्या का प्लान
सीओ तृतीय के अनुसार, इसी बीच अंकुश की दुष्यंत के जरिये साहिल व उत्कर्ष से मुलाकात हुई और एक दिन शराब पीते समय रोते हुए अंकुश ने जब साहिल के समक्ष अपना दर्द बयां किया और बताया कि संदीप उसकी परेशानी की जड़ है। बेटी का फोटो लेकर रोते हुए उसने कहा कि बेटी की बहुत याद आती है। अगर यह रास्ते से हटा दिया जाए तो सब ठीक हो जाए। बस वहीं हत्या की प्लानिंग बन गई। साहिल उसे अपने परिचित अपराधी प्रवीण से मिलाने ले गया और वहां सुपारी का सौदा तय हो गया। फिर एडवांस रुपये देने भी दोनों गए।
जेल में हुई थी दोस्ती की खातिर 25 से 20 लाख में सुपारी तय
सीओ तृतीय के अनुसार, साहिल व प्रवीण पिछले दिनों जेल रहे थे। तभी दोनों में दोस्ती हो गई। जब प्रवीण के समक्ष अक्तूबर में संदीप का फोटो देते हुए और उसकी गाड़ी का नंबर बताते हुए इस हत्या का प्लान रखा गया तो उसने पहले 25 लाख रुपये सुपारी मांगी। बाद में साहिल ने दोस्ती की दलील देते हुए कहा कि वैसे ही बहुत परेशानी है तो उसने सुपारी 20 लाख रुपये में तय कर दी।
एटा भी गए थे मारने, दीपावली पर टला था हत्या का प्लान
सीओ तृतीय के अनुसार, सुपारी तय होने के बाद प्रवीण ने कहा कि वह घटना के लिए गाड़ी का इंतजाम खुद कर लेगा। इसी क्रम में उसने मथुरा से गाड़ी लूटी और दो बार एटा भी संदीप को मारने गए। मगर वहां मौका नहीं मिल पाया। इसके बाद तय हुआ कि वह दीपावली पर अलीगढ़ में अधिकारियों व अपने व्यापारी संबंधों में गिफ्ट बांटने आएंगे। तब देखेंगे। मगर इस बार दीपावली पर वह नहीं आए। इसके चलते उस समय भी प्लान टल गया।
घटना के दिन अचानक एटा चुंगी पर दिखे संदीप
घटना वाले दिन शाम करीब 4 बजे एटा चुंगी से खैर मंडी किसी से रुपये लेने जा रहे थे, तभी उन्हें एटा से आते समय संदीप अपनी गाड़ी में दिखाई दिए। जिस पर खाटू श्याम का फोटो देख पहचान लिया। तत्काल साहिल ने प्रवीण को फोन पर जानकारी दी। उसने कहा कि दो ढाई घंटे में वह आ रहा है। तुम लोग नजर रखो। तत्काल साहिल ने मनीष के जरिये तीन लड़के बुलवाए और खुद दोनों उसका पीछा करते समय दुष्यंत के गैराज से गाड़ी बदलकर हरदुआगंज तक गए। इसी बीच तीनों लड़के आ गए, जिन्हें 250 रुपये लेकर सीमेंट फैक्टरी भेजा गया और खुद वापस दुष्यंत के गैराज पर आ गए। इसी बीच उत्कर्ष बुलाया गया। जहां से तीनों फिर सीमेंट फैक्टरी जाने लगे। मगर लड़कों ने खबर दी कि वह अनूपशहर रोड से शहर आ रहा है। इस पर ये तीनों अनूपशहर रोड पहुंचे और प्रवीण को उसी दिशा में बुलाया। मगर तब तक संदीप डीआईजी आवास पहुंच गए। इसके बाद सभी लोगों ने तस्वीर महल पर उसका इंतजार किया। यहां प्रवीण भी पहुंच गया था। डीआईजी के यहां से निकलकर इन लोगों ने फिर पीछा शुरू कर दिया और कावेरी स्थित दफ्तर पर कुछ देर रुकने के बाद जब संदीप ग्रीन पार्क के लिए चले तो मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दे डाला। इसके बाद प्रवीण ने इन्हें व्हाट्सएप कॉल पर घटना की जानकारी दी।
सिपाही लगा था नीली बलेनो के पीछे, खुद लेकर भागे शूटरों को
सीओ के अनुसार, दोनों ने स्वीकार किया कि घटना के बाद भागती नीली बलेनो के पीछे बुलेट सवार सिपाही लगा था। क्वार्सी पार करते ही उस सिपाही की सूचना पर हरदुआगंज पर चेकिंग शुरू हो गई। इस पर बदमाशों ने पहले तालानगरी में गाड़ी किढ़ारा रोड पर रोककर उस पर नंबर प्लेट बदली। फिर हरदुआगंज की ओर बढ़े तो थाने पर नाकेबंदी देख कस्बे के अंदर से माछुआ की ओर निकल गए। वहां भी पुलिस माछुआ पुल पर थी, जिस पर बीच रास्ते में गाड़ी रोक वे उतरकर खेतों में छिप गए, जहां से उन्होंने व्हाट्सएप कॉल के जरिये अंकुश व साहिल को बुलाया। ये दोनों अपनी क्रेटा कार दुष्यंत के गैराज पर छोड़कर वहां से फारच्युनर लेकर उस रास्ते पर गए। मगर पुलिस का ध्यान इनकी गाड़ी पर नहीं गया। पहले ये हरदुआगंज से माछुआ होते हुए पनैठी तक गए। इस दौरान शूटरों ने इन्हें कॉल किया और बताया कि हम फारच्युनर से पूरे रास्ते पर पुलिस देखते गए हैं। शूटरों ने बताया कि हमने तुम्हारी गाड़ी देखी है। इसके बाद जब ये संतुष्ट हो गए कि पुलिस हट गई और बलेनो ले गई तो ये लौटकर आए। शूटर इन्हें पैदल पनैठी की ओर आते मिल गए और तीनों को बैठाकर भागे। फिर तीनों को मथुरा में छोड़कर आगे निकल गए।