शहर में जितने भी बड़े संघ के कार्यक्रम होते थे, प्रशांत सिंघल उसमें जरूर आमंत्रित किए जाते रहे हैं। इससे प्रचारक से लेकर संघ के बड़े पदाधिकारियों से भी सीधे तौर पर प्रशांत सिंघल का संपर्क है।
वैसे तो शहर के जाने-माने उद्यमी प्रशांत सिंघल की आरएसएस और भाजपा से काफी नजदीकियां रही हैं। मगर अब अलीगढ़ मेयर के प्रत्याशी के तौर पर पहली बार सियासी पारी की शुरुआत करेंगे। पिछली बार भी मेयर की टिकट को लेकर काफी चर्चा रही थी। मगर, डॉ राजीव अग्रवाल को मेयर का प्रत्याशी बनाया गया था।
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मगर इस बार प्रशांत सिंघल पूरी दमदारी के साथ मैदान में उतरे थे। उन्होंने बकायदा अपना बायोडाटा प्रभारी सुनील पांडेय को दिया था। इसी के बाद से अटकलें लगने लगी थी कि इस बार मेयर की टिकट प्रसाद सिंघल को मिलेगी। प्रशांत सिंघल पर वैसे तो सीधे तौर पर अभी तक भाजपा का कोई पद नहीं रहा है, मगर भाजपा के दिग्गज नेताओं से उनकी काफी करीबी रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल से भी उनकी काफी नजदीकियां थी। माना जा रहा है कि उनके यह रिश्ते काम आए हैं। साथ ही भाजपा के केंद्र से लेकर प्रदेश तक के दिग्गज नेताओं से भी प्रशांत सिंघल का संपर्क था। वही सिंघल का आरएसएस से भी काफी जुड़ाव है। संघ के कार्यक्रमों में भी अधिकांशत उन्हें अध्यक्षता करते हुए देखा जाता था।
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टिकट मिलने से कुछ घंटों पहले आरएसएस कार्यक्रम में आए नजर
शहर में जितने भी बड़े संघ के कार्यक्रम होते थे, प्रशांत सिंघल उसमें जरूर आमंत्रित किए जाते रहे हैं। इससे प्रचारक से लेकर संघ के बड़े पदाधिकारियों से भी सीधे तौर पर प्रशांत सिंघल का संपर्क है।
रविवार को भी प्रशांत नुमाइश मैदान में छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित समारोह में भी शामिल हुए थे। इसलिए सुबह से ही अटकलें तेज हो गई थी। इस बार प्रशांत सिंघल को टिकट मिलेगी। चर्चा है कि टिकट मिलने के बाद साफ कह दिया गया है कि यह सीट इस बार हरहाल में निकालनी है। इसलिए भाजपा नेता जुट गए हैं।