कीमतें बढ़ने से बढ़ गई आलू की कद्र
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पिछले दो साल से बदहाली के शिकार सब्जियों के राजा आलू की कद्र एकाएक बढ़ गई है। दूसरे राज्यों में डिमांड बढ़ने से आलू के निर्यात में तेजी आई है, जिससे इसके दामों में भी बेहद सुधार हुआ है।
थोक बाजार में बड़ा आलू 750 रुपये प्रति बोरा और मध्यम साइज का आलू 650 रुपये प्रति बोरा तक बिक रहा है, जबकि पिछले साल बड़ा आलू आलू 400 रुपये और मध्यम आलू 250 रुपये प्रति बोरा तक बिका था। पिछले महीने के मुकाबले दोनों साइज के आलू के रेट में 50 से 100 रुपये प्रति बोरा तक का उछाल आया है।
रेट बढ़ते ही किसानों में आलू बेचने की होड़ लग गई है। इन-दिनों कोल्ड स्टोरों और मंडियों में आलू बेचने के लिए किसानों का तांता लग रहा है। मुंहमांगी कीमत पर किसान का आलू हाथों-हाथ उठ रहा है। थोक बाजार में आए आलू के दाम में इस उछाल का असर अब खुदरा बाजार पर भी दिख रहा है। खुदरा बाजार में आलू के दाम 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। दालों और हरी सब्जियों पर महंगाई की मार से जूझ रहे आम आदमी के लिए आलू पर आई यह महंगाई और ज्यादा भारी पड़ रही है। आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ा सकता है।
पिछले दो सालों में सूखे के कारण हरी सब्जियों के रेटों में आए लगातारउछाल के बावजूद सस्ते आलू ने गरीबों की थाली में सब्जी की कमी महसूस नहीं होने दी। जानकारों की मानें तो आलू के रेट में हुए सुधार का फायदा किसानों को कम, बिचौलियों को ज्यादा मिल रहा है। वह 650 से 750 रुपये तक में किसान से आलू खरीदकर बाहर की मंडियों में 850 से लेकर एक हजार रुपये प्रति बोरा के हिसाब से सप्लाई कर रहे हैं और डेढ़ सौ से ढाई सौ रुपये प्रति बोरा का अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं।