अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
इमरान हाशमी/संजय दत्त अभिनीत हिंदी फिल्म ‘उंगली’ तो आपने देखी ही होगी। कुछ इसी तर्ज पर तहसील कोल के अकराबाद क्षेत्र के गांव सुहावली का मजदूर गजराज सिंह उत्पीड़न का शिकार हो रहा है। उसका दोष सिर्फ इतना है कि वह सिस्टम की खामियों के खिलाफ आवाज उठा रहा है। आवाज उठाने का परिणाम यह हुआ कि उसके प्लाट की बाउंड्री राजस्व टीम ने जेसीबी लगाकर गिरा दी और फिर कह दिया कि गलती से गिर गई। अब वह उस बाउंड्री को बनवाने या उसका हर्जाना लेने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा है। मगर, मदद के बजाय अब उसकी जमीन का रकबा घटा दिया गया है और कागज इधर से उधर चल रहा है।
हरियाणा में फेरी लगाकर बर्तन बेचने वाले गजराज सिंह बताते हैं कि वह एक दिन गांव आए तो परिवार के कुछ लोगों ने बताया कि मनरेगा की मजदूरी नहीं मिल रही है। इसे लेकर गजराज ने ब्लाक से लेकर जिला, कमिशभनरी और शासन स्तर पर शिकायतें करनी शुरू कर दीं। शिकायत का परिणाम ये रहा कि निवर्तमान कमिश्नर ने उसकी शिकायत पर एटा के एडीएम के नेतृत्व में टीम बुलाकर जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट कमिशभनरी मुख्यालय में ही लंबित है।
गजराज की इसी शिकायत से चिढ़कर जांच में फंस रहे लोगों ने 27 नवंबर 2020 को सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने गांव पहुंची राजस्व टीम से साठ-गांठ कर आबादी से सटे उसके प्लाट की बाउंड्री गिरवा दी। मौके पर उसने विरोध किया तो कह दिया कि गलती हो गई। बाद में जब इसकी शिकायत उसने अधिकारियों से की तो राजस्व टीम ने उसके कब्जे का रकबा ही घटा दिया।
इस तरह उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इसे लेकर उसने कमिशभनर से 27 जनवरी को शिकायत की तो उन्होंने नायब तहसीलदार को मौके पर जाकर जांच कर आख्या तलब की है। गजराज का आरोप है कि अभी तक न तो कोई टीम जांच के लिए पहुंची है और न उसे कोई यह बताने को तैयार है कि उसकी बाउंड्री क्यों तोड़ी गई। उसकी जमीन का रकबा क्यों घटा दिया गया। इस समस्या को लेकर पीड़ित बुधवार को भी कमिशभनर से मिलने पहुंचा था।