जिले की पुलिस को सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी। एसओजी की टीम ने थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव तुरसैन के निकट से मुठभेड़ के बाद जिले का मोस्ट वांटेड अपराधी भीमा पहलवान को दबोच लिया। भीमा ने जहां पुलिस टीम पर देसी बम और तमंचे से फायरिंग की तो पुलिस ने भी अपने बचाव में गोलियां चलाईं। एक गोली भीमा के पैर में लगी और वह घायल हो गया। उसे बाद में पुलिस ने जिला अस्पताल में दाखिल कराया। भीमा की क्राइम हिस्ट्री काफी लंबी है। वह फिलहाल बहुचर्चित लक्ष्मण पहलवान और उसके साथी के दोहरे हत्याकांड में वांछित चल रहा था। उसकी मथुरा पुलिस को भी तलाश थी। उस पर पुलिस ने 35 हजार रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था। उसके पास से दो देसी बम और तमंचा भी बरामद हुआ है।
एसओजी टीम को सोमवार की दोपहर यह सूचना मिली कि जिले का मोस्ट वांटेड अपराधी भीमा पहलवान पुत्र भूदेव सिंह निवासी पैंथखेड़ा थाना खंदौली जिला आगरा तुरसैन गांव के निकट मौजूद है और बाइक से कहीं जाने की फिराक में है। इस पर एसओजी प्रभारी सुधीर कुमार सिंह ने अपनी टीम के साथ उसकी घेराबंदी कर ली। पुलिस को अपने निकट आता देख भीमा ने पुलिस पर तमंचे से फायरिंग कर दी और पुलिस टीम पर देसी बम भी बरसाए। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इसमें दो पुलिसकर्मी हेड कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह और कांस्टेबल सचिन धामा घायल हो गए। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई कर उसे दबोच लिया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में भीमा के दाहिने पैर में गोली लग गई और वह घायल होकर गिर पड़ा। बाद में उसे पुलिस यहां जिला अस्पताल लेकर आई। वहां पर सीओ सिटी रामशब्द यादव, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ वर्मा के अलावा कोतवाली निरीक्षक हाथरस गेट, कोतवाली निरीक्षक हाथरस सदर मय फोर्स के पहुंच गए। पैरामिलिट्री फोर्स भी वहां आ गई।
अपर पुलिस अधीक्षक ने देर शाम कोतवाली में मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि भीमा लंबे समय से कई हत्या और अन्य जघन्य वारदातों में फरार था। वह राजेश टोंटा गैंग का भी सक्रिय सदस्य था। वह वर्ष 2015 में हुए बहुचर्चित बृजेश मावी हत्याकांड में भी फरार चल रहा था। उस पर मथुरा पुलिस ने दस हजार रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था, जबकि हाथरस पुलिस ने भी उस पर 25 हजार रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था। 10 जनवरी को इगलास अड्डा निवासी लक्ष्मण पहलवान और उसके एक साथी रवि की हत्या में भी भीमा वांछित चल रहा था।