जेएन मेडिकल में हड़ताल के दौरान बच्चे को वापस लेकर जाते परिजन।
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जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल अब मरीजों पर भारी पड़ने लगी है। बिना इलाज के मरीज लौटने को मजबूर हैं। तीमारदारों का कहना है कि अपने मरीज कहां ले जाएं। नीट पीजी काउंसिलिंग में देरी होने और काम का बोझ बढ़ने से एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के जूनियर डॉक्टर 27 नवंबर से हड़ताल पर हैं। पहले इन लोगों ने ओपीडी फिर वार्ड में अपनी सेवाएं बंद की। इसके बाद इमरजेंसी में अपनी सेवाएं बंद कर दी, जिससे यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी होने लगी।
मरीज के साथ पहुंचे सरफराज ने कहा कि इस महंगाई के दौर में उनके लिए प्राइवेट अस्पताल में मरीज का इलाज कराना मुमकिन नहीं है। फिर भी मरीज को तड़पता नहीं देख सकते। इधर-उधर से पैसे का बंदोबस्त करके इलाज कराने की कोशिश करेंगे। आरडीए के सचिव डॉ. मोहम्मद आदिल ने बताया कि एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र सौंपकर नॉन एकेडमिक जेआर भर्ती करने की गुजारिश की है। एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली ने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज में जो भी सहूलियतें हैं, उन्हें मरीजों को उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास किया जाएगा। गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।