जिले में शनिवार को ऑक्सीजन का संकट गहरा गया। ऑक्सीजन खत्म होने पर निजी कोविड अस्पताल संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए। वहीं, दीनदयाल अस्पताल में भी शाम को ऑक्सीजन खत्म होने से वहां मरीजों और डाक्टरों की सांसें फूल गईं।
जिला प्रशासन ने करीब 20 मिनट में कासिमपुर स्थित राधा गैस प्लांट से कुछ सिलिंडरों का इंतजाम कराया। इसके बाद मरीजों ने राहत की सांस ली। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह और औषधि निरीक्षक हेमेंद्र चौधरी ने राधा गैस प्लांट पर डेरा डाल दिया है। वहां पर तीमारदारों और निजी अस्पतालों के संचालकों की लंबी कतार लगी है। हालात यह हैं कि कभी भी आक्रोश फूट सकता है।
जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए 14 निजी और सरकारी अस्पताल संचालित हैं। इनमें करीब 400 मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। इनके अलावा, सैकड़ों मरीज घरों में ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। इन सबकों करीब आठ टन ऑक्सीजन की जरूरत प्रतिदिन पड़ रही है।
मगर, जिले के पास इतनी मात्रा में गैस नहीं है। हर दिन पांच टन का इंतजाम हो पा रहा है। शनिवार को यह इंतजाम भी फेल हो गया। मोदीनगर, काशीपुर, कानपुर, रुड़की के ऑक्सीजन प्लांट संचालकों से जिला प्रशासन के अधिकारियों की बात हुई। मगर, वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
देर शाम तक निजी अस्पतालों में गैस खत्म होने की नौबत आ गई। इसके चलते उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। इधर, प्रशासन के सामने भी चुनौती आ गई। जिले में संचालित सभी ऑक्सीजन प्लांट बंद हो गए। सिर्फ राधा गैस प्लांट ही संचालित हो सका।
यहां हवा से ऑक्सीजन बनाई जाती है। इसलिए यह प्लांट संचालित हो रहा। दीनदयाल अस्पताल से भी देर शाम को यहीं से सप्लाई हो सकी। सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन पूरी कोशिश के साथ ऑक्सीजन की आपूर्ति में लगा है। कई जिलों में प्लांट संचालकों से वार्ता की गई है।