आरोप है कि गांव के कुछ लोग उनसे रंजिश रखते हैं। 26 जुलाई 2024 को आरोपियों ने घात लगाकर उस पर फायर किया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की, बल्कि जातिगत आधार पर अपमानित किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज न करके गालीगलौज की और एनकाउंटर की धमकी दी।
अलीगढ़ के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) सुभाष चंद्रा की अदालत ने गोंडा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश पारित किया है।
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इस संबंध में वेद प्रकाश की ओर से प्रार्थना पत्र धारा 173 (4) बीएनएसएस अदालत में प्रस्तुत किया गया था। जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष गोंडा ब्रजेश कुमार सिंह, थाना प्रभारी ईश्वर सिंह तोमर, दरोगा सुमरपाल सिंह, नदीम खान व लाल सिंह, धीरी, अंकित आदि के विरुद्ध याचिका दायर की। वेदप्रकाश का आरोप है कि गांव के कुछ लोग उनसे रंजिश रखते हैं। 26 जुलाई 2024 को आरोपियों ने घात लगाकर उस पर फायर किया। जिसमें वह बाल-बाल बच गया और जान बचाकर भागे। इसकी 112 नंबर पर सूचना दी तो पुलिस मौके पर आई और उसे लेकर थाने आ गई। आरोप है कि थाने में पहले से ही विपक्षी मौजूद थे। पुलिस ने उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की, बल्कि उसे जातिगत आधार पर अपमानित किया।
29 सितंबर 2024 को 11:30 बजे पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज न करके गालीगलौज की और एनकाउंटर की धमकी दी। जबकि विपक्षी धीर सिंह की तहरीर पर उसके समेत पांच के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। धीरी सिंह ने पूर्व में भी एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें घटना झूठी होने पर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित की गयी। आरोप है कि उन्हें आपराधिक प्रवृत्ति का बताते हुए आरोप पत्र प्रेषित किया गया है। पुलिस द्वारा विपक्षी की तहरीर पर विभिन्न आपराधिक मुकदमें कायम किए गए हैं।