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एएमयू से ‘मुस्लिम’ शब्द हटाने की सिफारिश का विरोध

Tue, 10 Oct 2017 01:44 AM IST
कौशल कुमार ओझा
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pro. M Shabbeer - फोटो : Amar Ujala
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यूजीसी की ओर से गठित ऑडिट कमेटी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ‘मुस्लिम’ एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ‘हिंदू’ शब्द हटाने की सिफारिश की है। मीडिया में यह खबर आने के बाद एएमयू में भूचाल की स्थिति है। एक तरफ छात्र इसे राजनीतिक षडयंत्र के रूप में देख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विधि विशेषज्ञ भाजपा सरकार को खुश करने के लिए क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर ऑडिट कमेटी पर काम करने का आरोप लगा रहे हैं।
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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एएमयू एवं बीएचयू से क्रमश: मुस्लिम एवं हिंदू शब्द हटाने की सिफारिश की बात कोई नई नहीं है। 1965 में देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री एमसी छाबला ने भी ऐसा ही सुझाव   दिया था।

इस्लामिक लॉ के विशेषज्ञ एवं एएमयू के विधि संकाय के पूर्व डीन प्रो. एम शब्बीर का कहना है कि आडिट कमेटी के विद्वानों ने न सिर्फ अपने क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण किया है, बल्कि मुस्लिम व हिंदू की बात कर अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय भी दिया है। उन्होंने भारत की धर्म निरपेक्षता पर कुठाराघात किया है।
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 प्रो. शब्बीर का कहना है कि यूजीसी ने कमेटी को एकेडमिक, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर व रिसर्च आदि की जांच का काम सौंपा था। वे लोग इसे लांघ कर हिंदू-मुस्लिम में फंस गए। अमेरिका एवं यूरोप में धर्म निरपेक्षता का मतलब एंटी रिलीजन हैं। जबकि भारत में इसका मतलब विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय आदि की विभिन्नता कायम रखना है। भारत विभिन्नता में एकता का देश है। यदि सभी धर्मों का विश्वविद्यालय यहां खुल जाए तो गलत नहीं है।

यहां हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी, बौद्ध व जैन धर्म आदि के विश्वविद्यालय खुल जाएं तो न तो वह धर्म निरपेक्षता के विरुद्ध है और न ही संविधान के विरुद्ध। हमारा संविधान तो यही चाहता है कि यहां सभी धर्म फले-फूलें। प्रो. शब्बीर का कहना है कि आडिट कमेटी के विद्वान एएमयू एवं बीएचयू के ऐतिहासिक एवं धार्मिक तथ्य से भी अनभिज्ञ हैं। दोनों विश्वविद्यालयों का नेशन बिल्डिंग में महत्वपूर्ण योगदान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी प्रतिष्ठा है। उनकी सिफारिश से दोनों यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को आंच पहुंची है।

यूजीसी द्वारा ऑडिट कमेटी का गठन किया गया था। इनकी सिफारिश का पालन यूनिवर्सिटी करे, ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। यूजीसी से इससे संबंधित कोई गाइडलाइन भी जारी नहीं हुई है। अभी बात सिर्फ मीडिया में है। रिपोर्ट पर यूजीसी या मंत्रालय की मुहर भी नहीं लगी है।  - प्रो. एम शब्बीर, एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन  

भाजपा का यह राजनीतिक स्टंट है, ताकि हिंदू-मुस्लिम आपस में लड़ते रहें और वह इसका लाभ उठाए। अमित शाह की प्रॉपर्टी 300 गुना बढ़ जाती है और उसके बाद उनके बेटे की 1600 गुना बढ़ जाती है। उस पर बात की जानी चाहिए, क्योंकि वह सब हम जैसे मध्यम वर्ग और गरीबों के हिस्से का पैसा है।  - फैजुल हसन, निवर्तमान अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ

जय शाह, महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी व किसानों की आत्महत्या के मुद्दे से भटकाने के लिए यह बीजेपी की नई चाल है। ताकि देश की जनता तमाम मुद्दे से भटककर हिंदू एवं मुसलमान की बहस में उलझ जाए। एएमयू से मुस्लिम एवं बीएचयू से हिंदू शब्द हटा देने से क्या देश की तरक्की हो जाएगी? - नदीम अंसारी, निवर्तमान उपाध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ

ऑडिट कमेटी की सिफारिश स्वागत योग्य है। एएमयू का नाम अलीगढ़ विवि ही था, लेकिन इसे सांप्रदायिक रूप देने के लिए इसमें मुस्लिम शब्द जोड़ दिया गया। जिसके परिणाम स्वरूप विश्वविद्यालय का स्वरूप ही बदल गया और एक केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्म विशेष का विश्वविद्यालय बन गया।  - डॉ. पुष्पेंद्र पचौरी, प्रदेश उपाध्यक्ष, एबीवीपी
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