ग्राम मई में राशन के कोटे की चिनगारी ज्वालामुखी बन चुकी है। समय रहते पुलिस प्रशासन ने कदम न उठाया तो गांव में किसी भी समय कोई अनहोनी भी हो सकती है। हालत यह है कि यहां पर लोग खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे हैं। न जाने कब गोलियां चलने लगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस प्रशासन द्वारा दोनों पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है और गिरफ्तारी होती है तो गांव में शांति हो सकती है नहीं तो किसी भी दिन कोई गंभीर हादसा भी हो सकता है। हालत यह है कि गांव में दोनों पक्षों के लोग खुलेआम असलाह लेकर गांव में घूमते रहते हैं। एक वर्ष पूर्व यहां पर तैनात रहे कोतवाल अनिल कुमार शर्मा के कार्यकाल में गांव में हो रही फायरिंग की घटनाओं को लेकर कई लोगों के अवैध असलाह जब्त करने के साथ ही मुकदमे दर्ज किये थे। दोनों पक्षों के मध्य समाज के लोगों द्वारा फैसला करा दिया गया। गांव से कोतवाली पुलिस फोर्स पहुंचने में कम से कम 30 से 40 मिनट तक समय लग जाता है। कहा तो यह भी जा रहा है। एक राजनेता का भी हस्तक्षेप मई की शांति में बाधक बना हुआ है। मंगलवार को भी दोनों पक्षों में फायरिंग हुई, जबकि इससे पहले कई बार दोनों पक्षों में खुलआम फायरिंग की हो चुकी है।
गौरतलब है कि 10 मार्च को राशन डीलर बच्चू सिंह गांव से किसी काम के लिए इगलास गया था। इसके बाद कहा जाता है कि वह एक कार्यक्रम में अहल्दा तक पहुंचा। अहल्दा से वह कहां गया कैसे गया रहस्य है, 12 मार्च को रक्त रंजित हालत में बच्चू सिंह मिला। परिजन उसको उपचार के लिए अलीगढ़ ले गए वहां से दिल्ली रेफर कर दिया। इस घटना के संबंध में गांव के कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
इसके बाद गांव में तनाव बढ़ता चला गया और एक घटना में गांव के दो युवक गोली से घायल हो गए। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात है, किंतु गांव में जैसे ही पुलिस फोर्स हटता है दोनों पक्षों की ओर से फायरिंग शुरू हो जाती है।