सामान्य बीमारियों के इलाज का इंतजार कर रहे लाखों लोगों को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। वह सरकारी और निजी अस्पतालों में अब उपचार प्राप्त कर सकेंगे। ये व्यवस्था एक दो दिन में शुरू हो जाएगी। प्रदेश के मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों में सामान्य ओपीडी सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मरीजों को देखने व उपचार देने के दिशा निर्देश सभी जिलाधिकारी और सीएमओ को भेजे गए हैं। इससे पहले प्रथम चरण में बीती 24 मई को प्रदेश के सभी जिला अस्पताल, महिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में आवश्यक सेवाओं की ओपीडी शुरू की गई थी। अब द्वितीय चरण में सभी प्रकार की ओपीडी सेवाओं को चालू कर दी गई हैं। जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ प्राइवेट अस्पतालों में सभी तरह के मरीजों का उपचार शुरू होगा। किसी भी अस्पताल में मरीज के साथ तीमारदार के रूप में गर्भवती महिला, बच्चे या 60 वर्ष की आयु के व्यक्ति का प्रवेश निषेध रहेगा।
सरकारी अस्पतालों के निर्देश
1-अस्पताल आने वाले सभी मरीजों और तीमारदारों की इंफ्रारेड थर्मामीटर से स्क्रीनिंग की जाएगी।
2-एक रोगी के साथ मात्र एक तीमारदार को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
3-रोगी और तीमारदार को अनिवार्य रूप से मास्क पहनना जरूरी है।
4-जुकाम, सर्दी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ से परेशान रोगियों को अलग कक्ष में उपचार दिया जाएगा।
5-जुकाम, सर्दी, बुखार या सांस रोगी के लिए अलग से कक्ष आरक्षित किया जाएगा। इस कक्ष के दिशासूचक बनाए जाएंगे। जिससे वह भीड़ में पंजीकरण कराने न जाएं।
6-पंजीकरण काउंटर पर पर्चा बनाने वाले को मास्क और ग्लब्स पहनना अनिवार्य है।
7-जिन अस्पतालों में ओपीडी के मरीजों की संख्या अधिक है। वहां एक से ज्यादा पंकजीरण केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके।
8-नान कम्यूनिकेबिल डीजीज जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर के रोगियों को एक महीने की दवा दी जाएगी, ताकि वह बार-बार अस्पताल न आएं।
9-सभी डॉक्टर व कर्मी मास्क और ग्लब्स का प्रयोग करेंगे। हाथ धोने की भी समुचित व्यवस्था की जाएगी।
प्राइवेट अस्पतालों के निर्देश
1-एक या दो चिकित्सक युक्त प्राइवेट क्लीनिक ही ओपीडी सेवा प्रारंभ करेंगे।
2-यथासंभव रोगियों हेतु पहले से ही समय देकर ओपीडी संचालित होगी।
3-ओपीडी के लिए प्रति घंटे 4 -5 रोगियों को ही समय दें, जिससे अनावश्यक भीड़ न हो।
4-सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, ग्लब्स, हाथ धोने का समुचित इंतजाम कराएं जाएं।
5-डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कोविड-19 संबंधित प्रोटोकाल और इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकाल की जानकारी हो।
6-मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए एक पृथक स्थल एवं सुरक्षित स्क्रीनिंग व्यवस्था स्थापित एवं क्रियाशील हो।
7-चिकित्सालय में सुरक्षात्मक उपकरण, मास्क, ग्लब्स के साथ पीपीई किट भी हो।
8-परिसर को एक फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइट सोल्यूशन द्वारा विसंक्रमित कराया जाए।
9-बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाए।