21वीं पशुगणना में यह सामने आया कि गधे, खच्चर और घोड़ों की संख्या लगातार घट रही है। अमर उजाला ने जब इन पशुपालकों से बात की तो उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर, मिनी ट्रैक्टर और लोडर ने काम छीन लिया।
शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अलीगढ़ में सिर्फ 58 गधे बचे हैं। 15 साल में इनकी संख्या में 18 गुना कम हुई है। इसी तरह खच्चर छह गुना कम होकर 364 ही रह गए। यह दोनों पशु माल ढुलाई में काम आते हैं, लेकिन समय के साथ संसाधनों में आए बदलाव की वजह से ये अब लुप्त होते जा रहे हैं। यह जानकारी 21वीं पशुगणना में सामने आई है। इसमें यह भी पता चला है कि घोड़ों की संचया भी घटकर 782 रह गई। अमर उजाला ने जब इन पशुपालकों से बात की तो उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर, मिनी ट्रैक्टर और लोडर ने काम छीन लिया।
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रामकली से चलता है घर
छर्रा के गांव बढ़ौरी बुजुर्ग के चिरंजीलाल का घर उनकी मेहनत और घोड़ी रामकली के सहारे से चलता है। वह ईंट भट्ठे पर 180 रुपये प्रति हजार की दर से ईंटें ढोते हैं। यह ईंटे 100 मीटर दूर पहुंचानी पड़ती हैं। दिन भर में 800 रुपये का काम करते हैं, जिससे पत्नी यशोदा, बेटे चिंटू, पिंटू और बेटी शिवांगी का पालन पोषण होता है। चिंटू भी इसमें मदद करता है। दो भाई भी बस्ती में ईंट भट्ठों में यही काम करते हैं। चारा महंगा होने और काम कम होने से अब गुजारा मुश्किल हो गया है। रामकली का दिन का खर्च लगभग 150 रुपये हो गया है।
46 हजार छोटे वाहन पड़ रहे भारी
आरटीओ के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में लगभग 35082 ट्रैक्टर, 6000 मिनी ट्रैक्टर, 4687 लोडर दौड़ रहे हैं। जुगाड़ गाड़ी को भी जोड़ दें तो इनकी संख्या 46 हजार है। इसमें 10 फीसदी की सालाना वृद्धि होती है। इसी वजह से घोड़ा गाड़ी वालों का काम कम हो रहा है।