अलीगढ़ में बन्नादेवी के नगला कलार में वाल्मीकि युवक की हत्या में सीसीटीवी से पहचाना गया एक आरोपी 19 अप्रैल को जेल भेजा गया है। उसने स्वीकारा है कि आपसी गुटबाजी में किसी अन्य युवक की हत्या के इरादे से वे लोग वहां गए थे। अंजाने में वाल्मीकि युवक बीच में आ गया। तभी गोली चलने से उसकी जान चली गई।
जवां निवासी वाल्मीकि युवक मुरारी लाल की 19 अप्रैल की गोली मारकर हत्या हुई थी। पत्नी सुशील ने पड़ोसी मोहल्ला लच्छिमपुर के हिमांशु लोधी, नगला कलार के कुलदीप, केवल विहार के सोफू को नामजद कर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने सीसीटीवी से मामले में जांच की तो दो बाइकों पर चार आरोपी चिह्नित हुए। इनकी पहचान हिमांशु, सोफू, जतिन व कुश के रूप में हुई। जिनमें से श्रीरामपुरम कॉलोनी के कुश को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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सीओ द्वितीय राजीव द्विवेदी के अनुसार कुश ने पूछताछ में स्वीकारा कि वह एक अन्य मामले में जेल गया था। वहां उनका एक गुट बन गया। जेल से बाहर आने पर इलाके के युवकों में रंगबाजी में वर्चस्व को लेकर गुटबाजी शुरू हो गई। इसी गुटबाजी में आए दिन विवाद होने लगा। इसी विवाद में घटना वाले दिन दूसरे गुट के युवक को मारने गए थे।