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कागजों पर दौड़ गईं टैक्सी तो निरीक्षण भी था फर्जी

Sat, 13 Aug 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मोबाइल हेल्थ टीम को कराए गए टैक्सी परमिट वाहन में की गई वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक आलोक कुमार के निर्देशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। तय समय सीमा में जांच पूरी नहीं हो पाई है। साथ ही फर्जी टैक्सी बिलों के भुगतान के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जब गाड़ियां ही नहीं चलीं तो सुपरविजन का काम भी नहीं हुआ है। इसका अर्थ यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र या अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में सुपरविजन का काम नहीं हुआ है।
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29 जुलाई को निदेशक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर कहा था कि वर्ष 2015-16 में आरबीएसके कार्यक्रम के अंतर्गत वाहनों को किराए पर लेने और उसका भुगतान करने में बरती गयी गंभीर वित्तीय अनियमितता के लिए कौन-कौन दोषी है? दोषी फर्म व उसके कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 10 दिनों के अंदर अवगत कराएं।
दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना भी सुनिश्चित करें। लेकिन 10 दिनों की समय सीमा बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी यह तय नहीं कर पाए कि वित्तीय अनियमितता के लिए दोषी कौन है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि बिल पर गाड़ी नंबर क्यों नहीं है? यह बिल सभी पटलों से होकर पास भी हो गए।  बिना गाड़ी चले भुगतान भी हो गया। इसके अलावा जब गाड़ी ही नहीं चली तो जिस काम के लिए या अभियान के लिए वह दिखायी जा रही है तो वह सुपरविजन का काम भी नहीं हुआ है।
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