प्रदेश में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ की पहली सर्वोच्च प्राथमिकता गोवंश और और गोशालाएं हैं। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने गोवंश और गोशालाओं पर विशेष ध्यान दिया था। इस बार भी सीएम अधूरी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ने वाले। इसको दृष्टिगत रखते हुए जिले में विभागीय अफसर अब गोशालाओं में व्याप्त खामियों को दुरुस्त करने के लिए अलर्ट मोड़ पर आ गए हैं।
जिले में कुल 125 सरकारी गोशालाएं हैं। इनमें करीब 32 हजार से अधिक छुट्टा गोवंश हैं। सरकार इन गोवंश के चारा-पानी के लिए रोजाना 30 रुपये खर्चा देती हैं। गांव देहात की गोशालाओं की देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायतों व नगर पंचायत में नगरीय निकाय के पास है। जिले की अधिकांश गोशालाओं में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। यहां गोवंश के रहन-सहन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं।
हालांकि डीएम ने जिले की हर गोशाला के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर रखी है। इन अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे नियमित रूप से गोशालाओं में भ्रमण कर चारा, भूसा, पानी व साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था का भी ध्यान रखें। अगर कहीं कोई खामी है तो इसकी रिपोर्ट पशुपालन विभाग को सौंप दें।
जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। गभाना व अतरौली तहसील में वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना की गई है। इगलास, खैर एवं कोल में इनका निर्माण हो रहा है। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में घूम रहे निराश्रित व छुट्टा गोवंश को राजस्व विभाग, नगर निगम, पशुपालन विभाग, ग्राम पंचायत एवं आमजन के सहयोग से निकटतम गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित कराया जा रहा है।
-डॉ. चंद्रवीर सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी