फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गिन-गिन बीते दिन... 15 मौतें, नकदी गायब

Fri, 30 Dec 2016 02:39 AM IST
आशीष श्रीवास्तव
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक की मोहलत मांगी थी। आज वह तारीख आ पहुंची है। उनके मुताबिक कल से राहत के दिन शुरू हो जाएंगे। कितनी राहत मिलेगी यह तो 31 दिसंबर से ही पता चलेगा, लेकिन ये पचास दिन बड़ी मुश्किल से बीते हैं।
विज्ञापन

 गुरुवार को नोटबंदी से पंद्रहवीं मौत हो गई। 
पिसावा के गांव राऊपुर निवासी 58 वर्षीय किसान वीरपाल सिंह पुत्र लक्खी सिंह बीमार थे। इलाज के लिए बैंक खाते से अपने रुपये निकालने के लिए वह लाइन में लगे रहे, लेकिन रुपये नहीं मिले। रुपये नहीं थे तो दवाएं भी नहीं मिलीं और अचानक हालत गंभीर हुई तो मौत ने निगल लिया। नोटबंदी के बाद ये 15वीं दुखद मौत थी।
खैर, अब बात पीएम मोदी की बात पर भरोसा करने की है तो हकीकत में अब तक नकदी का संकट दूर नहीं हुआ है। 50 दिनों में अलीगढ़ में बैंकों ने लगभग 1100 करोड़ रुपया बांटा है, जबकि इसी अवधि में पुराने नोटाें की शक्ल में लगभग दो हजार करोड़ की धनराशि जमा हुई है। बैंक  के आला अधिकारियों की मानें तो अलीगढ़ में जब तक पांच हजार करोड़ रुपये की नकदी बैंक से बाजार तक नहीं फैलेगी तब तक बैंक, एटीएम और बाजार में पैसे की किल्लत बनी रहेगी। ऐसा कब तक संभव होगा इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। 
विज्ञापन

इधर, बैंकों को लोनिंग में 1200 करोड़ का नुकसान हुआ है। रिजर्व बैंक से नकदी का आगमन तो बढ़ा है, लेकिन अभी भी बैंकों में 40 फीसदी व्यवस्था ही ढर्रे पर लौटी है। ग्राहकों को अभी भी करेंट एकाउंट की लिमिट के अनुसार 50 हजार तो सेविंग एकाउंट में भी अधिकतम 24 हजार नहीं मिल पा रहे हैं। करंट में 40 तो सेविंग में महज 20 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं।
एसबीआई के वरिष्ठ प्रबंधक राकेश चंद नेगी ने स्वीकार किया कि पिछले एक  सप्ताह में पुराने नोटों की आवक में भारी कमी आई है। अब सभी शाखाओं में बमुश्किल 50 लाख तक के पुराने नोट आ रहे हैं। उम्मीद केवल इस बात से बढ़ी है कि इस दौरान ई ट्रांजेक्शन में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, जो पहले बहुत कम थी। 
कारोबार हुआ धड़ाम
बैंकों में नकदी की समस्या के चलते नकदी संकट से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए। न भुगतान हो सके और न ही खरीद। 
रिजर्व बैंक से करीब एक माह तक नई करेंसी न आने के कारण एसबीआई समेत अन्य बड़ी बैंक एवं एटीएम की झोली खाली, जनता रही परेशान।  3-वेतन एवं पेंशन के लिए मिले अधिकतम दस हजार, आम ग्राहकों को दो-चार हजार देकर चलाया काम। 
नौ दिसंबर को एसबीआई समेत अन्य बैंकों को भेजी गई करीब 30 करोड़ की राशि के बाद लेन देन का स्तर सुधरा। पिछले दो सप्ताह से कुछ सुधार। 
50 दिन की अवधि में बैंकों में तोड़फोड़ से लेकर मारपीट एवं जाम जैसी दर्जनों घटनाएं हुईं। परेशान लोगों ने पुलिस को भी नहीं बख्शा। 
ताला कारोबार में करीब 50 फीसदी से अधिक छोटे-बड़े कारखाने बंद हो गए। करीब 75 हजार श्रमिक एवं उनके परिवार भुखमरी पर पहुंचे।
हार्डवेयर कारोबार भी 45 से 50 फीसदी तक गिरा है। 50 हजार के करीब श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। कोई बेलदारी तो कोई रिक्शा चला रहा। 
सर्राफा, रेडीमेड, फुटवियर, मेडिकल, प्रोविजन, स्पोर्ट्स, गुड्स, किराना, साड़ी, लेडीज आइटम एवं कपड़ों का काम 30 फीसदी तक रह गया है। 
बफैलो मीट एक्सपोर्ट में अब तक लगभग 1200 करोड़ रुपये का कारोबारी नुकसान। कारोबार मार्च तक पटरी पर लौटने की उम्मीद। 
अनाज की थोक मंडी में ब्रिकी नहीं। केवल उधारी पर कुछ माल खरीदा जा रहा है। मंडी कारोबार दो महीने से पूरी तरह से ठप है।
नोटबंदी से हुई 14 मौते
17 नवंबर-हाथरस की केनरा बैंक मुख्य शाखा में खोड़ा हजारी निवासी वृद्ध सियाराम की मौत।
20 नवंबर-इगलास में मजदूर कुंवर पाल की मौत।
21 नवंबर-देहलीगेट इलाके में रजिया बेगम ने आग लगाई, मौत।
25 नवंबर-जटटारी में मानपुर निवासी बुजुर्ग चिरमौली की मौत।
07 दिसंबर-गांव सैदपुर निवासी 45 वर्षीय महेश पुत्र श्योराज की मौत।
09 दिसंबर-अतरौली के गांव शेखपुर के भानुप्रकाश, जवां के रठगांव निवासी शब्बीर पुत्र भूरे खां व थाना बन्नादेवी के सिद्घार्थ नगर निवासी सेवानिवृत्त नलकूप कर्मी उदयवीर खन्ना की मौत।
13 दिसंबर-गंगीरी में दादों निवासी 16 वर्षीय गीतम सिंह पुत्र जयप्रकाश की मौत।
14 दिसंबर-भुजपुरा निवासी 45 वर्षीय श्रमिक शमीम की मौत।
16 दिसंबर-जलाली के गांव बहरामपुर निवासी 32 वर्षीय अली हसन, इसी गांव के शिवकुमार, गांव चिरौलिया ब्लाक धनीपुर की आंगनबाड़ी 50 वर्षीय राजरानी व गंगीरी के गांव नगला खार निवासी जयवीर की बेटी की मौत।
विज्ञापन

29 दिसंबर को पिसावा के गांव राऊपुर निवासी 58 वर्षीय किसान वीरपाल सिंह को बैंक से पैसे नहीं मिले तो दवा के अभाव में मौत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें