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ब्लैक फंगस से डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत : डॉ. कल्याणी

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जनपद में ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमायकोसिस) के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में 11 संदिग्ध मरीजों का उपचार चल रहा है। यहां के निवासियों की दूसरे शहरों में उपचार चलने की सूचना मिल रही है। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि ब्लैक फंगस से डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोगों एवं बच्चों को ब्लैक फंगस से कोई खतरा नहीं है।
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सीएमओ ने कहा कि ब्लैक फंगस अनियंत्रित मधुमेह के रोगियों में ज्यादा होने की संभावना है। ऐसे में मधुमेह के रोगी शुगर को नियंत्रित रखें और जिन लोगों को कोविड-19 का संक्रमण हुआ है, वह चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।
बहुत तेजी से फैलता है ब्लैक फंगस
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्यास खान कहते हैं कि ब्लैक फंगस एक फंगल इंफेक्शन है जो बहुत तेजी से शरीर में फैलता है। इसका असर नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में आंखों की रोशनी तक चली जाती है। अगर फंगस ब्रेन तक पहुंच जाए तो मरीज की मृत्यु तक हो सकती है। जिनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ होता है और स्टेरॉयड लेते हैं, उनमें इंफेक्शन होने की आशंका रहती है।
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शुरुआती लक्षण...
नाक में कालापन होना, आंखों के आसपास कालापन होना, चेहरे पर सूजन, आंखों का घूमना कम हो जाना, दो-दो चीजें दिखाई देना
अनदेखी पड़ सकती है भारी..
आंखों का बाहर की ओर निकलना, दिखना बंद हो जाना, निरर्थक बातें करना, खड़े-खड़े गिर जाना
बरतें सावधानी...
- डायबिटीज रोगी ज्यादा सावधानी बरतें, शुगर का स्तर नियंत्रित रखें
- कोरोना से ठीक होकर आए हैं तो ब्लैक फंगस के लक्षणों पर ध्यान दें
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय करते रहें
- संतुलित और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें
- पोस्ट कोविड या सामान्य दोनों ही स्थिति में पर्याप्त नींद लेना जरूरी
बचाव के तरीके...
- स्टेरॉयड का उचित प्रयोग चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए
- कोविड मरीजों को ऑक्सीजन देते समय पानी रोजाना बदलते रहे
- दो बार नाक को स्लाइन से धोएं
- साफ -सफाई का विशेष ध्यान रखें
- लक्षण दिखने पर जल्द से जल्द चिकित्सक से सलाह लें
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