आईसीयू संचालन के लिए डॉ. उमर फारूक अंसारी ने नोएडा में सरकारी खर्चे पर तीन महीने तक प्रशिक्षण लिया था। मगर अस्पताल में आईसीयू की सुविधा न होने के चलते उनकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगा दी गई।
अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल में आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) न होने के चलते हर महीने हार्ट अटैक के 45 मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। आईसीयू संचालन के लिए शासन के खर्च पर तीन महीने तक प्रशिक्षण ले चुके डॉ. उमर फारूक अंसारी का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा हार्ट अटैक के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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2 अक्टूबर को सुबह 11:35 बजे इमरजेंसी परिजनों के साथ आए शाहजमाल के 52 वर्षीय जमील अहमद के सीने में दर्द उठ रहा था। परिजनों ने डॉक्टर को दिखाया, लेकिन उन्हें फौरन जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए कह दिया गया। इसी तरह अस्पताल के इमरजेंसी में रोजाना एक-दो हृदय संबंधी बीमारी के मरीज आते हैं। औसत हर महीने 45 हार्ट अटैक के मरीजों को चिकित्सा सुविधा न होने के चलते जेएन मेडिकल कॉलेज सहित हायर सेंटर के लिए कर दिए जा रहे हैं।
आईसीयू संचालन के लिए डॉ. उमर फारूक अंसारी ने नोएडा में सरकारी खर्चे पर तीन महीने तक प्रशिक्षण लिया था। मगर अस्पताल में आईसीयू की सुविधा न होने के चलते उनकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगा दी गई। ऐसे में उनके अनुभव का फायदा अस्पताल आने वाले हार्ट अटैक के मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।